नवीन लेख
विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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संगत और उसका प्रभाव
दिनांक 24 सितंबर 2025 कुसंगत (बुरी संगति) के दुष्प्रभाव –कुसंगत का अर्थ है ऐसे लोगों की संगति करना जिनके विचार, आचरण और व्यवहार गलत या अनैतिक हों। इसका व्यक्ति के जीवन पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नीचे कुसंगत के प्रमुख दुष्प्रभाव विस्तार से दिए गए हैं -1. चरित्र का पतन – कुसंगत में…
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विश्वव्यापी सत्सनातन धर्माध्यात्म – संस्कृति
दिनांक 21 सितम्बर 2025“सत्यार्थ प्रकाश” के अनुसार – # अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र, सृष्टिकर्ता, सचिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी मात्र एक दाता ॐ सबका राम है और सकल संसार उसके आगे भिखारी है l*वैदिक सत्सनातन ज्ञान व धर्म – # सकल संसार में मात्र वैदिक…
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2. भक्ति, श्रद्धा, प्रेम का पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
भगवान श्रीकृष्ण लगभग 5000 वर्ष ईश्वी पूर्व इस धरती पर अवतरित हुए थे। उनका जन्म द्वापर युग में हुआ था। द्वापर युग, हिंदू धर्म के चार युगों में से दूसरा युग है। यह युग सत्ययुग के बाद और कलयुग से पहले आता है। द्वापर युग को धर्म, सत्य और सदाचार का युग माना जाता है।…
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सशक्त न्याय व्यवस्था की आवश्यकता
दिनांक 29 जुलाई 2025 सत्य, न्याय, नैतिकता, सदाचार, देश, सत्सनातन धर्म, संस्कृति के विरुद्ध मन, कर्म और वचन से की जाने वाली कोई भी चेष्टा अपराध मानी जा सकती है l अपराधों की श्रेणियां – देखा जाये तो विश्व भर में अपराधों की अनेकों श्रेणियां हैं l कोई भी व्यक्ति, कोई भी व्यक्ति संगठन या…
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सनातन धर्म के सोलह संस्कार
दिनांक 20 जुलाई 2025 सनातन धर्म के सोलह संस्कारसनातन धर्म में मानव जीवन के सोलह संस्कारों का प्रावधान है जो जीवन के समस्त क्रिया-कलापों को दर्शाते हैं, ज्ञान-विज्ञान सम्मत हैं l 1 गर्भादान संस्कार – युवा स्त्री-पुरुष अर्थात पति-पत्नी उत्तम सन्तान प्राप्ति के लिए विशेष तत्परता से प्रसन्नता पूर्वक गर्भादान करें l 2 पुंसवन संस्कार…
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ब्राह्मण – ज्ञानवीर
उद्देश्य – विश्व कल्याण हेतु ज्ञान विज्ञान का सृजन, पोषण और संवर्धन करना l – ब्रह्मा जी का मुख ब्राह्मण होने के कारण ज्ञानी, विद्वान्, बुद्धिमान, वैज्ञानिक, न्यायविद, गुरु, आचार्य, अध्यापक, शिक्षक और अभिभावक ब्राह्मण हैं l – ज्ञान बुद्धि का आभूषण है जिसे ब्राह्मण धारण करता है l – # ब्राह्मण एक वह वास्तुकार…
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क्षत्रिय – शूरवीर
उद्देश्य – ब्राह्मण, नारी, धर्म, राष्ट्र, गाये के प्राणों की रक्षा – सुरक्षा की सुनिश्चितता बनाये रखना l – # राजनीति एक वह मंच है जिससे राजनेताओं द्वारा जनता की सेवा की जाती है। इस मंच पर उन लोगों को आगे अवश्य आना चाहिए जो सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय का अर्थ भली प्रकार समझते हैं…
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सन्तान बेटा-बेटी
बेटा-बेटी में भेदभाव — परिवार में बेटे के जन्म पर हर्ष परन्तु बेटी के जन्म पर निराशा क्यों ?- बेटा एक ही परिवार का पालन-पोषण करता है पर बेटी दो परिवारों का ध्यान रखती है, फिर बेटी का जन्म लेने से किसी परिवार का अपमान कैसा ?- बेटा एक परिवार का नाम रोशन करता है…
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पति-पत्नी
नर – नारी – सृष्टि में तीन तत्व ईश्वर, जीव और प्रकृति प्रमुख हैं । सृष्टि चलाने हेतु जुगल नर – नारी की आवश्यकता होती है । नारी के बिना किसी भी नर के लिए परिवार की कल्पना करना असंभव है । नारी अपने परिवार और समाज के कल्याणार्थ अपना सब कुछ न्योछावर कर देती…
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सन्यास आश्रम
सत्सनातन धर्म में मनुष्य के आत्म कल्याण हेतु गृहस्थ जीवन त्यागकर, वानप्रस्थ आश्रम या एकांत निवास में रहकर स्व इन्द्रिय शमन और मनो निग्रह करके सन्यास आश्रम में प्रवेश करने का प्राबधान है l