श्रेणी: मानव जीवन दर्शन
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16. क्या हमारा जीवन त्रुटिपूर्ण है ?
17 नवम्बर 1996 कश्मीर टाइम्स मानव जीवन दर्शन प्रगति करने वाला विवेकशील मनुष्य अपने जीवन को सदैव त्रुटिपूर्ण मानता है l वह उन त्रुटियों के होने की कभी चिंता नहीं करता है बल्कि उनको दूर करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है l आधुनिक काल में हर स्थान पर हड़तालें, बंद, घेराव, संप्रदायक दंगे, हिंसा…
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1. सद्गुण संस्कार और हमारा दायित्व
आलेख – मानव जीवन दर्शन असहाय समाज वर्ग जनवरी जून 1996 ईश्वर द्वारा रचित प्रकृति में पृथ्वी और उसके चारों ओर ब्रह्मांड बड़ा विचित्र है l सूर्य में ताप, चन्द्रमा में चांदनी, वायु में सरसराहट और नदियों में कल-कल के मधुर संगीत का मिश्रण इस बात का का द्योतक है कि समस्त ब्रह्मांड में जो…
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2. सद्गुण संस्कार और हमारा दायित्व
आलेख – मानव जीवन दर्शन कश्मीर टाइम्स 5 मई 1996 ईश्वर द्वारा रचित प्रकृति में पृथ्वी और उसके चारों ओर ब्रह्मांड बड़ा विचित्र है l सूर्य में ताप, चन्द्रमा में चांदनी, वायु में सरसराहट और नदियों में कल-कल के मधुर संगीत का मिश्रण इस बात का का द्योतक है कि समस्त ब्रह्मांड में जो भी…
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1. मानव जीवन – एक रहस्य
आलेख – कश्मीर टाइम्स 28.1.1996ईश्वर की संरचना प्रकृति जितनी आकर्षक है, वह उतनी विचित्र भी है l जड़-चेतन उसके दो रूप हैं l इनमें पाई जाने वाली विभिन्न वस्तुओं और प्राणियों की अपनी-अपनी जातियां हैं l इन जातियों में मात्र मनुष्य ही प्रगतिशील प्राणी साधक है l वह विवेक का स्वामी है l ऐसे…