श्रेणी: सत्सनातन धर्म संस्कृति
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धर्म की उपेक्षा के दुष्परिणाम
दिनांक 19 अप्रैल 2026धर्म का आशय केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड से नहीं है, बल्कि वह जीवन को सही दिशा देने वाली नैतिकता, कर्तव्यबोध, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की समग्र व्यवस्था है। जब समाज या व्यक्ति धर्म की उपेक्षा करता है, तो उसके अनेक दुष्परिणाम सामने आते हैं।1. नैतिक मूल्यों का पतन -धर्म सत्य, अहिंसा, करुणा,…