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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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अखंड भारत से क्या अभिप्राय है ?
दिनांक 19 नवंबर 2025 “अखण्ड भारत” एक सांस्कृतिक – ऐतिहासिक और राजनीतिक – विचारधारात्मक अवधारणा है। इसका प्रयोग अलग – अलग व्यक्तियों या समूहों द्वारा अलग अर्थों में किया जाता है। 1. अखण्ड भारत का मूल अभिप्राय अखण्ड भारत का सामान्य अर्थ है – “एक ऐसा भारत जो बिना विभाजन के, एकात्मक और अविभाजित हो।”यह…
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ब्राह्मण का अर्थ
दिनांक 20 अक्तूबर 2025“ब्राह्मण” एक संस्कृत शब्द है जो “ब्रह्म” (परम सत्य, ज्ञान या ईश्वर) से बना है l इसका मूल अर्थ ज्ञान और सत्य के ज्ञाता व्यक्ति से है l शास्त्रीय दृष्टि से – मनुस्मृति वेद और पुराणों के अनुसार – ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म (परमात्मा या सत्य ज्ञान) को जानने सिखाने और…
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मतदान करो, करवाओ – लोकतंत्र सशक्त बनाओ
दिनांक 2 अक्तूबर 2025त्रिगुणमयी प्रकृति – गीता अनुसार – “प्रकृति त्रिगुण प्रधान है – सात्विक गुण, राजसिक गुण और तामसिक गुण l गुण गुणों में वर्तते हैं l सभी त्रिगुण एक दूसरे के विपरीत व्यवहार करते हैं l जैसे सात्विक गुण प्रबल होने पर राजसिक, तामसिक गुण निर्बल हो जाते हैं l राजसिक गुण के…
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संगत और उसका प्रभाव
दिनांक 24 सितंबर 2025 कुसंगत (बुरी संगति) के दुष्प्रभाव –कुसंगत का अर्थ है ऐसे लोगों की संगति करना जिनके विचार, आचरण और व्यवहार गलत या अनैतिक हों। इसका व्यक्ति के जीवन पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नीचे कुसंगत के प्रमुख दुष्प्रभाव विस्तार से दिए गए हैं -1. चरित्र का पतन – कुसंगत में…
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विश्वव्यापी सत्सनातन धर्माध्यात्म – संस्कृति
दिनांक 21 सितम्बर 2025“सत्यार्थ प्रकाश” के अनुसार – # अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र, सृष्टिकर्ता, सचिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी मात्र एक दाता ॐ सबका राम है और सकल संसार उसके आगे भिखारी है l*वैदिक सत्सनातन ज्ञान व धर्म – # सकल संसार में मात्र वैदिक…
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2. भक्ति, श्रद्धा, प्रेम का पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
भगवान श्रीकृष्ण लगभग 5000 वर्ष ईश्वी पूर्व इस धरती पर अवतरित हुए थे। उनका जन्म द्वापर युग में हुआ था। द्वापर युग, हिंदू धर्म के चार युगों में से दूसरा युग है। यह युग सत्ययुग के बाद और कलयुग से पहले आता है। द्वापर युग को धर्म, सत्य और सदाचार का युग माना जाता है।…
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सशक्त न्याय व्यवस्था की आवश्यकता
दिनांक 29 जुलाई 2025 सत्य, न्याय, नैतिकता, सदाचार, देश, सत्सनातन धर्म, संस्कृति के विरुद्ध मन, कर्म और वचन से की जाने वाली कोई भी चेष्टा अपराध मानी जा सकती है l अपराधों की श्रेणियां – देखा जाये तो विश्व भर में अपराधों की अनेकों श्रेणियां हैं l कोई भी व्यक्ति, कोई भी व्यक्ति संगठन या…
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सनातन धर्म के सोलह संस्कार
दिनांक 20 जुलाई 2025 सनातन धर्म के सोलह संस्कारसनातन धर्म में मानव जीवन के सोलह संस्कारों का प्रावधान है जो जीवन के समस्त क्रिया-कलापों को दर्शाते हैं, ज्ञान-विज्ञान सम्मत हैं l 1 गर्भादान संस्कार – युवा स्त्री-पुरुष अर्थात पति-पत्नी उत्तम सन्तान प्राप्ति के लिए विशेष तत्परता से प्रसन्नता पूर्वक गर्भादान करें l 2 पुंसवन संस्कार…
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ब्राह्मण – ज्ञानवीर
उद्देश्य – विश्व कल्याण हेतु ज्ञान विज्ञान का सृजन, पोषण और संवर्धन करना l – ब्रह्मा जी का मुख ब्राह्मण होने के कारण ज्ञानी, विद्वान्, बुद्धिमान, वैज्ञानिक, न्यायविद, गुरु, आचार्य, अध्यापक, शिक्षक और अभिभावक ब्राह्मण हैं l – ज्ञान बुद्धि का आभूषण है जिसे ब्राह्मण धारण करता है l – # ब्राह्मण एक वह वास्तुकार…
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क्षत्रिय – शूरवीर
उद्देश्य – ब्राह्मण, नारी, धर्म, राष्ट्र, गाये के प्राणों की रक्षा – सुरक्षा की सुनिश्चितता बनाये रखना l – # राजनीति एक वह मंच है जिससे राजनेताओं द्वारा जनता की सेवा की जाती है। इस मंच पर उन लोगों को आगे अवश्य आना चाहिए जो सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय का अर्थ भली प्रकार समझते हैं…