श्रेणी: लोकतान्त्रिक चुनाव
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मैं और मेरा बहुमूल्य मतदान
मैं अपने मत का सहर्ष प्रयोग करूंगा – मेरा मत बहुमूल्य है – मैं अपना मतदान उसे करूंगा – मेरा मतदान व्यर्थ नहीं जायेगा –
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मतदान करो, करवाओ – लोकतंत्र सशक्त बनाओ
दिनांक 2 अक्तूबर 2025त्रिगुणमयी प्रकृति – गीता अनुसार – “प्रकृति त्रिगुण प्रधान है – सात्विक गुण, राजसिक गुण और तामसिक गुण l गुण गुणों में वर्तते हैं l सभी त्रिगुण एक दूसरे के विपरीत व्यवहार करते हैं l जैसे सात्विक गुण प्रबल होने पर राजसिक, तामसिक गुण निर्बल हो जाते हैं l राजसिक गुण के…
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8. यह कैसा लोकतंत्र है ?
कश्मीर टाइम्स 10 अगस्त 1996 स्वतंत्रता प्राप्त कर लेने के पश्चात हमारे प्रिय जन नायकों ने लोकतंत्र – जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए “जनता राज” अथवा लोकतंत्र शासन प्रणाली की पुनर्स्थापना करने का प्रयास किया था l उसी रूप को साकार करने के लिए उन्होंने भारत का संविधान भी बनाया था ताकि उसे…