श्रेणी: परम्परागत गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था
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श्रेणी: शिक्षा ज्ञान – विज्ञान
जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति
जिज्ञासा –1.- “जिज्ञासा रखना” – विद्यार्थी का एक विशेष गुण है 2.- जिज्ञासा रखने से – “ज्ञान” प्राप्त होता है lज्ञान –1.- ज्ञान का मुख्य स्रोत – “गुरु” है l2.- बिना गुरु – कभी “ज्ञान” नहीं मिलता है l3.- माता-पिता, अध्यापक और अध्यात्मिक गुरु से “ज्ञान” मिलता है l4.- सत्य “ब्रहम” है और ब्रहम ही…
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ब्राह्मण – ज्ञानवीर
उद्देश्य – विश्व कल्याण हेतु ज्ञान विज्ञान का सृजन, पोषण और संवर्धन करना l – ब्रह्मा जी का मुख ब्राह्मण होने के कारण ज्ञानी, विद्वान्, बुद्धिमान, वैज्ञानिक, न्यायविद, गुरु, आचार्य, अध्यापक, शिक्षक और अभिभावक ब्राह्मण हैं l – ज्ञान बुद्धि का आभूषण है जिसे ब्राह्मण धारण करता है l – # ब्राह्मण एक वह वास्तुकार…
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परम्परागत गुरुकुल शिक्षा
– # परिवार में बच्चों को संस्कार मिलते हैं। गुरुकुल में उनका पोषण और संवर्धन होता है ।*- # संस्कार विहीन शिक्षा समाज के लिए अभिशाप है।*- आत्मानुशासन की शिक्षा परम्परागत गुरुकुल से ही मिल सकती है – माता-पिता के सानिध्य में पहला गुरुकुल घर है और दूसरा गुरु-आचार्य के सानिध्य में उनका गुरुकुल l…
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श्रेणी: गुरु – आचार्य
गुरु – आचार्य
– # विद्यार्थी को तराशकर एक योग्य ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र कोई बना सकता है तो वह गुरु ही हो सकता है l* – दूषित राजनीति से छुटकारा दिलाने हेतु चाणक्य जैसे आचार्यों को, चन्द्र गुप्त मौर्य जैसे विद्यार्थियों के साथ, आगे अवश्य आना पड़ता है l – जब जब चाणक्य जैसा कोई आचार्य…