जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    अखंड भारत से क्या अभिप्राय है ?

    दिनांक 19 नवंबर 2025अपना अखंड भारत “अखण्ड भारत” एक सांस्कृतिक-ऐतिहासिक और राजनीतिक-विचारधारात्मक अवधारणा है। इसका प्रयोग अलग-अलग व्यक्तियों या समूहों द्वारा अलग अर्थों में किया जाता है। 1. अखण्ड भारत का मूल अभिप्राय अखण्ड भारत का सामान्य अर्थ है—“एक ऐसा भारत जो बिना विभाजन के, एकात्मक और अविभाजित हो।”यह विचार इस मान्यता पर आधारित है…

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    आदर्श जीवन क्या होता है ?

    19 नवंबर 2025 आलेख आदर्श जीवन “आदर्श जीवन” एक सार्वभौमिक सत्य नहीं है, बल्कि व्यक्ति के उद्देश्य, मूल्य, धर्म, समाज और अनुभवों के अनुसार बदलता रहता है। फिर भी, प्राचीन भारतीय ज्ञान (गीता, उपनिषद), आधुनिक मनोविज्ञान और व्यवहारिक जीवनशैली – तीनों के आधार पर हम एक संतुलित, सुंदर और व्यावहारिक “आदर्श जीवन” की संरचना समझ…

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    अखंड भारत से क्या अभिप्राय है ?

    दिनांक 19 नवंबर 2025 “अखण्ड भारत” एक सांस्कृतिक – ऐतिहासिक और राजनीतिक – विचारधारात्मक अवधारणा है। इसका प्रयोग अलग – अलग व्यक्तियों या समूहों द्वारा अलग अर्थों में किया जाता है। 1. अखण्ड भारत का मूल अभिप्राय अखण्ड भारत का सामान्य अर्थ है – “एक ऐसा भारत जो बिना विभाजन के, एकात्मक और अविभाजित हो।”यह…

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    मतदान करो, करवाओ – लोकतंत्र सशक्त बनाओ

    दिनांक 2 अक्तूबर 2025त्रिगुणमयी प्रकृति – गीता अनुसार – “प्रकृति त्रिगुण प्रधान है – सात्विक गुण, राजसिक गुण और तामसिक गुण l गुण गुणों में वर्तते हैं l सभी त्रिगुण एक दूसरे के विपरीत व्यवहार करते हैं l जैसे सात्विक गुण प्रबल होने पर राजसिक, तामसिक गुण निर्बल हो जाते हैं l राजसिक गुण के…

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    संगत और उसका प्रभाव

    दिनांक 24 सितंबर 2025 कुसंगत (बुरी संगति) के दुष्प्रभाव –कुसंगत का अर्थ है ऐसे लोगों की संगति करना जिनके विचार, आचरण और व्यवहार गलत या अनैतिक हों। इसका व्यक्ति के जीवन पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नीचे कुसंगत के प्रमुख दुष्प्रभाव विस्तार से दिए गए हैं -1. चरित्र का पतन – कुसंगत में…

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