जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    मानव जीवन में अनुशासन का महत्व

    दिनांक 31 दिसंबर 2025 आलेख मानव मानव जीवन में अनुशासन का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति के व्यक्तिगत, सामाजिक और पेशेवर जीवन में सफलता और स्थिरता सुनिश्चित करने में एक आधारभूत भूमिका निभाता है। इसे विस्तार से समझते हैं:1. अनुशासन का अर्थअनुशासन का अर्थ है नियमों, नियमावली और स्व-नियंत्रण का पालन करना। यह व्यक्ति…

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    मंदिर का उचित रख – रखाव कैसे करें ?

    संकलित दिनांक 17 अक्तूबर 2025मंदिर का उचित रख – रखाव (संरक्षण और देखभाल) एक पवित्र और जिम्मेदारी भरा कार्य है l इसे ठीक से करने के लिए शारीरिक, अध्यात्मिक और सामाजिक तीनों पक्षों का ध्यान रखना अति आवश्यक है l 1 स्वच्छता और व्यवस्था – प्रतिदिन फर्श, दीवारें, मूर्तियाँ और आस – पास का क्षेत्र…

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    भगवद्गीता सार

    संकलित दिनांक 27 दिसंबर 2025भगवद्गीता महाभारत का एक भाग है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। यह संवाद भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में हुआ। गीता जीवन, कर्म, धर्म, मन, आत्मा और मोक्ष का गहरा लेकिन व्यवहारिक ज्ञान देती है।1. गीता की पृष्ठभूमि -क्यों उपदेश दिया गया ? – अर्जुन…

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    आदर्श जीवन कैसे अपनाएँ ?

    दिनांक 28 नवंबर 2025 आलेख आदर्श जीवन आदर्श जीवन अपनाना कोई एक-दिन का काम नहीं है – यह एक निरंतर साधना, सही दृष्टिकोण, और व्यवहार में छोटे-छोटे बदलावों का परिणाम है। नीचे इसे सरल लेकिन गहराई से समझाया गया है, ताकि आप इसे अपने जीवन में वास्तविक रूप में लागू कर सकें। आदर्श जीवन कैसे…

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    आदर्श जीवन की बाधाएं और समाधान

    दिनांक 28 नवंबर 2025 आलेख आदर्श जीवन आदर्श जीवन का अर्थ है ऐसा जीवन जिसे व्यक्ति नैतिकता, संतुलन, आत्म-विकास और समाज में योगदान के आधार पर उत्तम समझे। आदर्श जीवन प्राप्त करना आसान नहीं होता, क्योंकि इसमें कई प्रकार की बाधाएँ आती हैं। साथ ही, उनके समाधान भी हैं। नीचे विस्तार से समझते हैं:आदर्श जीवन…

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