जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: विभिन्न पत्रिकाएं

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    2. भटका राही

    कश्मीर टाइम्स 21 फरवरी 2010 भटक गया हूँ, राह से राह मैं अपनी भूलकर सही राह पर, आऊं भी तो कैसे? मैं राह खुद की खुद पहचानकर इच्छा और आशाओं के गहन अंधेरे में खो गया मेरा जीवन है तालाश खुद की, खुद करूँ कैसे? मैं नाहक बन गया दीन हीन हूँ क्या है अच्छा,…

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    1. चैक डैम

    कश्मीर टाइम्स 7 फरवरी 2010 थम जा, ये जल की धारा! छोड़ उतावली, बहे जाती है किधर?मुंह उठा, देख तो जरा, चैक डैम बन गया है इधरतू बाढ़ का भय दिखाना पीछे, पहले गति मंद करले अपनी,तू भूमि कटाव भी करना पीछे, पहले चाल धीमी करले अपनी,यहां रोकना है, थोड़ी देर, रुक सके तो रुक…

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    1. मानवी उर्जा – ब्रह्मचर्य

    जनवरी 2010 मातृवन्दनाविद्यार्थी जीवन को ब्रह्मचर्य जीवन कहा गया है। इस काल में विद्यार्थी गुरु जी के सान्निध्य में रह कर समस्त विद्याओं का सृजन, संवर्धन और संरक्षण करके स्वयं अपार शक्तियों का स्वामी बनता है। सफल विद्यार्थी बनने के लिए विद्यार्थी को ब्रह्मचर्य या मानवी उर्जा का महत्व समझना अति अवष्यक है। ब्रह्मचर्य के…

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    1. छब्बीस जनवरी

    मातृवंदना जनवरी 2010 दुखिया का दुःख मिटाने को, दुःख से राहत दिलाने को, आशा का दीपक बन हम जगमगाएँ, छब्बीस जनवरी है आज, आओ! खुशी का दिन मनाएंयुवावर्ग में हो नवजीवन का संचार, दूर भागे सबकी निराशाओं का अंधकार, काँटों में से फूल हम चुनचुन कर लाएँ, छब्बीस जनवरी है आज, आओ! खुशी का दिन…

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    3. स्वदेश प्रेम

    मातृवंदना दिसम्बर 2009 स्वदेशी पका, पौष्टिक, ताजा खाने वालो!तुम फास्ट-फूड खाते हो क्यों ?पहले सदा अरोग्य ओर स्वस्थ रहते थे,अब तुम रोगी बन रहे हो क्यों?फास्ट-फूड है विदेशी खाना,कोई नहीं कहता, यह भारत के हैं पकवान,पकवान स्वदेशी छोड़, तुम खाते विदेशी पकवानकोई नही कहेगा,तुम्हें स्वदेश से है ममता महान

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