श्रेणी: विभिन्न पत्रिकाएं
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1. भारतीय शिक्षा की महक
असहाय समाज वर्ग 1995 अक्तूबर दिसम्बर प्राचीन भारतीय निशुल्क शिक्षा-प्रणाली अपने आप में विशाल हृदयी होने के कारण विश्वभर में जानी और पहचानी गई थी l भारत विश्व गुरु कहलाया था l भारतीय शिक्षा गुरुकुल परम्परा पर आधारित थी जिसमें सहयोग, सहभोज, सत्संग, लोक अनुदान की पवित्र भावना सद्विचार,सत्कर्मो से विश्व का कल्याण होता था…
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2. पाश्चात्य शिक्षा से हमें क्या मिला ?
असहाय समाज वर्ग 1995 अक्तूबर-दिसम्बर भारत पराधीन हो गया l कारण था – उस समय के महत्वाकांक्षी, अहंकारी राजनीतिज्ञों का अपने गर्व में चूर रहकर छोटी-छोटी बातों के लिए मात्र अपने हित में बदले की भावना से एक दूसरे को नीचा दिखाने हेतु आपस में लड़ते रहना l स्थान-स्थान पर आचार्यों तथा विद्वानों का अपमान…
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1. किस काम का
असहाय समाज वर्ग जुलाई सितम्बर 1995 सेवा जो कर न सके, वह तन है किस काम का ? नाम जो जाप न सके, वह मन है किस काम का ? कार्य जो सिद्ध कर न सके, वह धन है किस काम का ? सन्मार्ग जो दिखा न सके, वह ज्ञान है किस काम का ?…