श्रेणी: विभिन्न पत्रिकाएं
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1. सनातन है जीने की कला !
15 जनवरी 2011 कश्मीर टाइम्सकिसी ने ठीक ही कहा है – “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत lपारब्रह्म को पाइए, मन ही के प्रतीत”अर्थात मन से हार मान लेने से मनुष्य की हार होना निश्चित है परन्तु हारकर भी मन से न हारना और युक्ति-युक्त होकर अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए…
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3. समृद्ध भारत और उसकी गरिमा
दिसम्बर 2010 मातृन्दनाविश्व में भारत आर्यवर्त के नाम से जाना जाता था। उसे समृद्धि के उच्चासन पर सुशोभित करने का श्रेय देश के उन वीर व वीरांगनाओं को जाता है जो भारत के इतिहास में नक्षत्रों की भांति दीप्यमान हैं। उन्होंने अपने समस्त सुखभोगों का परहित के लिए त्याग कर दिया था। उन्हें राष्ट्र, समाज और जन हित…
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1. राष्ट्रीय समर्थ भाषा
2010 छमाही ज्ञान वार्तावह समाज और राष्ट्र गूंगा है जिसकी न तो कोई अपनी भाषा है और न लिपि। अगर भाषा आत्मा है तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भाषा से किसी व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र की अभिव्यक्ति होती हैं।विश्व में व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र का भौतिक विकास और आध्यात्मिक उन्नति के लिए स्थानीय, क्षेत्रीय, प्रांतीय,…
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3. भारत माँ
मातृवन्दना नवम्बर 2010 तू धरती, हमारी माता, गुण तेरे सारा जग गाता, करते हैं हम तुझे प्रणाम, भारत माँ ————-भारत माँ,सागसब्जी, तू तिलहन उपजाती, अनाज, कंदमूल हमें खिलाती, तू माँ, हम तेरी संतान, भारत माँ ————-भारत माँतुझे दुःख हमसे मिलते, युग बीत गए पीड़ा सहते, तू देती नहीं ध्यान, भारत माँ ——–भारत माँपूत कपूत हो…
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4. वेद महिमा
कश्मीर टाइम्स 3 अक्तूबर 2010 वेद भारती संस्कृति, वेद भारती समृद्धि, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद भारती आयना, वेद भारती आत्मा, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद भारती ज्ञान, वेद भारती विज्ञान, सत्यमेव——-सत्यमेववेद आर्य कर्म, वेद आर्य धर्म, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद मान भारती, वेद प्राण भारती, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद भू भारती, आर्य भू भारती, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद भाग्य विधाता, वेद…