श्रेणी: विभिन्न पत्रिकाएं
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2. देख सके तो
दैनिक जागरण 8 जनवरी 2006 स्वामी सबका ईश्वर है प्राणी हैं अनेकजीवन सबका समान है देख सके तो मन से देखनारी सबकी जननी है माताएं हैं अनेकबच्चे सबके समान हैं देख सके तो मन से देखज्ञान जननी बुद्धि है मस्तिष्क हैं अनेकआत्म ज्ञान समान है देख सके तो मन से देखखून सबका लाल है विचार…
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1. चेतना
दैनिक जागरण 6 जनवरी 2006 सेवा जो कर न सकेवह तन है किस काम कानाम जो जाप न सकेवह मन है किस काम काकार्य जो सिद्ध कर न सकेवह धन है किस काम कासन्मार्ग जो दिखा न सकेवह ज्ञान है किस काम काजीवनरस जो भर न सकेवह धर्म है किस काम कामानवसृजन जो कर न…
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1. ज्ञान चालीसा
दिव्य हिमाचल 19.3.2005 1. लोक भ्रमण करने से विषय वस्तु को भली प्रकार समझा जाता है l 2. साहित्य एवंम सदग्रंथ पढ़ने से विषय वास्तु का बोध होता है l 3. अधिक से अधिक जिज्ञासा रखने से ज्ञान-विज्ञान जाना जाता है l 4. सुसंगत करने से विषयक ज्ञान-विज्ञान का पता चलता है l 5. बड़ों…
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3. भूजल भंडार करे उद्धार
दिव्य हिमाचल 23 दिसम्बर 2004नभ से बूंदाबांदी होती टिप टिप टिपधरा पर इधर उधर गिरती पड़ती टिप टिप टिपसांए सांए करती जलधारा बन करनाली नाला नदी रूप बन करपहाड़ से जंगल और मैदान की ओरजलधारा बढ़ती जलाश्य की ओरउसे बहना है वह बहती जाती हैपहाड़ से चलती सागर से मिल जाती हैवर्षा जल आता आंधी…
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2. जल संकट नहीं होने देंगे
दिव्य हिमाचल 7 दिसम्बर 2004जल की हर बूंद है अनमोलजल से जीवन का है मोलबूंदबूंद से भर जाता है घड़ापगपग पर जल करना है खड़ाबावड़ी बना कर कूप बना करतालाब बना कर जलाशय बना करबावड़ी यहां पर कूप वहां परतालाब यहां पर जलाशय वहां परभूजल का स्तर बढ़ाना हैनमीदार पेड़ जंगल उगाना हैनदियों को स्वच्छ…