श्रेणी: मातृवंदना शिमला
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1. मेहनत का राज
मई 2011 मातृवन्दना मेहनत करने वालों को कम बहुत हैं नहीं करने वालों को हैं बहुत बहाने वही कहें आंगन टेढ़ाजो कभी नाचना न जाने मेहनत लग्न से होती है दिल – दिमाग एक करना जो जाने मेहनत करने वालों को कम बहुत हैं नहीं करने वालों को हैं बहुत बहाने जबरन न उनको कम…
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2. शिक्षा और अध्यात्म ने जोड़ा है बिखरा समाज
मातृवंदना अप्रैल 2011 सत्य ब्रह्म है और ब्रह्म ही सत्य है l ऐसा वेद कहते हैं l वेद भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के दिव्य आधार स्तंभ रहे हैं जो सदियों से मानव जाति में सत्य, कर्म, धर्म और शौर्यता का संचार करते आये हैं l हमारे पूर्वज आर्य थे l आर्य सत्यप्रिय, कर्मनिष्ठ, धार्मिक और…
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2. विश्व दर्पण में भारतीय संस्कृति
फरवरी 2011 मातृवंदनाप्राचीन भारत वर्ष विश्व मानचित्र पर आर्यावर्त देश रहा है l आर्य वेदों को मानते थे l वे अपने सब कार्य वेद सम्मत करते थे l वेद जो देव वाणी पर आधारित है, उन्हें ऋषि मुनियों द्वारा श्रव्य एवम् लिपिवद्ध किया हुआ माना जाता है l वेदों में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद अथर्वेद प्रमुख…
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3. समृद्ध भारत और उसकी गरिमा
दिसम्बर 2010 मातृन्दनाविश्व में भारत आर्यवर्त के नाम से जाना जाता था। उसे समृद्धि के उच्चासन पर सुशोभित करने का श्रेय देश के उन वीर व वीरांगनाओं को जाता है जो भारत के इतिहास में नक्षत्रों की भांति दीप्यमान हैं। उन्होंने अपने समस्त सुखभोगों का परहित के लिए त्याग कर दिया था। उन्हें राष्ट्र, समाज और जन हित…
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3. भारत माँ
मातृवन्दना नवम्बर 2010 तू धरती, हमारी माता, गुण तेरे सारा जग गाता, करते हैं हम तुझे प्रणाम, भारत माँ ————-भारत माँ,सागसब्जी, तू तिलहन उपजाती, अनाज, कंदमूल हमें खिलाती, तू माँ, हम तेरी संतान, भारत माँ ————-भारत माँतुझे दुःख हमसे मिलते, युग बीत गए पीड़ा सहते, तू देती नहीं ध्यान, भारत माँ ——–भारत माँपूत कपूत हो…