श्रेणी: मातृवंदना शिमला
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1. भारतीय संस्कृति का संरक्षण आवश्यक
नवम्बर 2009 मातृवन्दनायह बात सर्व विदित है कि भारत ऋषि मुनियों का देश रहा है। मनीषियों ने मानव जीवन को मुख्यता चार आश्रमों में विभक्त किया था। उनमें ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यासाश्रमों के अपने विशेष सिद्धांत थे।, उच्च आदर्श थे। उनके अनुसार मनुष्य अपना सार्थक एवं समर्थ जीवन यापन करता हुआ अपार शक्तियों का स्वामी बन जाता था। भारत…
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2. विषधर जानो
सितम्बर 2009 मातृवंदनासमझ सके, समझ ले भाई!चापलूस सांप दोनों हैं सगे भाई,चापलूस चापलूसी करता है,जहर सांप उगला करता है,चापलूस नहीं साथी किसी का,मतलब निकाला करता है,दूध पिलाओ चाहे जितनासांप डंक मारा करता है,बात जान ले, सारा यह जहान!चापलूस और सांप दोनों एक समान,
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1. पन्द्रह अगस्त
अगस्त 2009 मातृवंदनाआज दिन पन्द्रह अगस्त का आया हैजीने का अधिकार सबने पाया हैरिश्वत किसी से नहीं लेनी थी इसनेघूस किसी को नहीं देनी थी उसनेतूने कमिशन खाने का अधिकार किससे पाया हैआज दिन पन्द्रह अगस्त का आया हैयहांवहां गबनों का दौर चल रहा हैआए दिन घेटालों का पिटारा खुल रहा हैपलपल माल चोरी का…
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4. और लम्बी होंगी बेरोजगार की शृंखलाएं
आलेख – सामाजिक चेतना मातृवन्दना सितम्बर 2008भारत में औद्योगिक क्रांति आने के पश्चात्, कल-कारखानों और मशीनों के बढ़ते साम्राज्य से असंख्य स्नातक, बेरोजगार की श्रृंखलाओं में खड़े नजर आने लगे हैं l उनके हाथों का कार्य कल-कारखाने और मशीनें ले चुकीं हैं l वह कठोर शरीर-श्रम करने के स्थान पर भौतिक सुख व आराम की…
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3. आओ पर्यावण स्वच्छ बनाएं
जून 2008 मातृवंदनाविश्व में हमारी दैनिक आवश्यकताएं बहुत हैं। वह इस समय इतनी अधिक बढ़ गई हैं कि उनसे हमें पल-पल सोचने ही के लिए नहीं बल्कि कुछ न कुछ करने के लिए भी बाध्य होना पड़ता है। हम जो भी कार्य करते हैं भले ही के लिए करते हैं परन्तु कभी-कभी यह भलाई के…