जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: मातृवंदना शिमला

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    2. सनातन जीवन में धन की उपयोगिता

    मई 2012 मातृवन्दनाभारत ऋषि -मुनियों का देश  है। भारतीय मनीषियों  ने मानव जीवन को 100 वर्ष  तक मुख्यतः चार आश्रमों में विभक्त किया था। उनमें प्रथम 25 वर्ष  ब्रह्मचर्य, 25 से 50 वर्ष  गृहस्थ, 50 से 75 वर्ष  वानप्रस्थ और 75 से 100 वर्ष  तक सन्यास आश्रम प्रमुख थे। उनके अपने विशेष  सिद्धांत थे, उच्च आदर्श  थे जिनके अनुसार मनुष्य  अपना सार्थक एवं समर्थ जीवन…

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    1. सत्सनातन जीने की कला

    मातृवंदना फरवरी 2012 किसी ने ठीक ही कहा है – “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत lपारब्रह्म को पाइए, मन ही के प्रतीत”अर्थात मन से हार मान लेने से मनुष्य की हार होना निश्चित परन्तु हारकर भी मन से न हारना और युक्ति-युक्त होकर अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत…

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    4. ठगी का नया दौर !

    मातृवंदना सितंबर 2011 सामाजिक जन चेतना जहाँ भारत को जिस तेजी के साथ विश्व की भावी आर्थिक शक्ति माना जाने लगा है, उससे भी तीव्र गति से देश में सक्रिय कुछ देशी, विदेशी अंतर्राष्ट्रीय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों और उनके एजेंटों की अनैतिक गति विधियों के द्वारा लोगों की जेबों में दिन – दिहाड़े डाका भी…

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    3. मैकाले की सोच और भारतीय शिक्षा – प्रणाली

    जुलाई 2011 मातृवंदनाहिमाचल की मासिक पत्रिका मातृवंदना अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित लेख “मैकाले की सोच-1835 ई0 में” के अनुसार यह एक वास्तविक लेख है। इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है। ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकाॅर्ड में सुरक्षित है। लाॅर्ड मैकाले को भारत में तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल लाॅर्ड…

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    2. माँ

    जून 2011 मातृवन्दना सिंहनी बलवान सिंह जन्म देकर सदा अभय होकर सोती है गधी दस गधों की माँ होकर भी दुःख पाती, बोझा ढोती है सौ पुत्र थे, गन्धारी- धृतराष्ट्र के, दुःख ही दुःख पाया था पांच थे कुंती के प्यारे पांडव, दुःख में भी सुख पाया था माँ ! तू जनना धर्म परायण,ज्ञाननिष्ठ, कला…

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