श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
घृणा
कर घृणा नीच विचारों से, मगर इन्सान से नहीं lकरके घृणा इन्सान से, मनः पा सकता तू भगवान नहीं ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
मिट्टी का खिलौना
मिट्टी का खिलौना है तू, पर ये तो भूल गया है lहड्डी, लकड़ी, कोयला यहाँ, मनः सब धूल बन गया है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
इन्सान था
इंसान था मगर तूने खुद से खुद बैर किया है lखुदा तो खुद बन बैठा है, मनः खुद को तूने भुला दिया है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
प्रार्थना-भजन
प्रार्थना, भजन होता है मन से, मन मंदिर के बंद किवाड़ खोल lस्पीकर, बाजे, चिमटे छैनें फैंक परे, मनः तू देवालय में उच्च न बोल ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
दुखिया
दुखिया को दुःख न दे, वह तो दुःख का मारा है lमरे को मारना भला क्या ? मनः उसका नहीं कोई सहारा है ll