श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
संतोष का प्याला
पी ले संतोष का प्याला, जो तेरे पास है lमेहनत की है तूने जितनी, मनः फल तो तेरे पास है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
ठोकर
ठोकर बड़ी होती है, बड़ा तू नहीं इंसान lजब तुझको ठोकर लगी , तब होश आई है इन्सान ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
धीरे-धीरे
खाना है तो ठंडा करके होंठ नाजुक जलते हैं lकाम अच्छा होता धीरे-धीरे, मनः शहद के भी छत्ते भरते हैं ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जगत की रीत
पैदा हुआ सो मिट जायेगा, है यही जगत को रीत lझूठी है हर वस्तु यहाँ, मनः ज्यादा न बढ़ा प्रीत ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
घर
ओह ! चेहरा भीग गया है, क्यों आंसू गिराती हैं आँखें lयहाँ घर अपना नहीं है किसीका, मनः तू भर न यों ही आहें ll