श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
प्रभु प्रमाण
हजार करो तीर्थ, लाख करो स्नान, जिसका हृदय साफ नहीं, कैसे प्रत्यक्ष मिले प्रभु प्रमाण ?
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जाति भेद – भाव
मानव जाति भेद-भाव की दीवारें तोड़ो, जन-जन का मानव संग नाता जोड़ो l
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
चरित्रवान
इन्सान बना वही, लिया जिसने खुद को पहचान lफूंक-फूंककर हर कदम चले, मनः दाग से बचे चरित्रवान ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
श्रेष्ठ साहित्य
श्रेष्ठ साहित्य है कामधेनु, दूध सम देता है शक्ति l ज्ञानी की बात छोड़ो, मनः मुर्ख भी करने लगता है भक्ति l
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
मदिरा
नहीं रहता माँ, बहन, बेटी पत्नी का भेद वहां lमदिरा का चलता है मनः दौर खुले आम जहाँ ll