मैं अपने मत का सहर्ष प्रयोग करूंगा –
- संविधान के अनुसार – मैं (मतदाता) भारत का नागरिक हूँ l
- भारत का संविधान मुझे चुनाव में मतदान करने का अधिकार देता है l
- मेरी आयु इस समय 18वर्ष से ऊपर है, मैं अपने मन पसंद के प्रत्याशी को अपना मतदान कर सकता हूँ l
- मुझे अपना मतदान करने से कोई भी नहीं रोक सकता l
- मैं संविधान के अनुसार निर्धारित समय पर अपने निकट के मतदान केंद्र में जाऊंगा और अपने मन पसंद प्रत्याशी को अपना मतदान अवश्य करूंगा l
मेरा मत बहुमूल्य है –
- मेरे मत से बढ़कर, मेरे लिए विश्व की किसी चल या अचल धन संपदा का कोई मूल्य नहीं है l
- मेरे मत को मुझसे कोई भी बाहुबली अपने धनबल से नहीं खरीद सकता l
- किसी प्रकार का भय या कोई भी लालच मेरी सोच को कभी नहीं बदल सकता l
- मैं मतदान केंद्र में अपनी प्रतीक्षित बारी से अपने मतदान का सही प्रयोग अवश्य करूंगा l
मैं अपना मतदान उसे करूंगा –
- जो प्रत्याशी निजहित भुलाकर जनहित में कार्य करेगा l
- जो प्रत्याशी निजहित से ऊपर देश – धर्म – संस्कृति का हित समझेगा l
- जो प्रत्याशी निजहित त्यागकर समस्त समाजहित में कार्य को बढ़ावा देगा l
- जो प्रत्याशी मेरे गाँव का चहुंमुखी विकास करेगा l
- जो प्रत्याशी मेरे प्रान्त का सर्वांगीण उत्थान करेगा l
- जो प्रत्याशी मेरे भारत को पुनः सोने की चिड़िया बनाएगा l
मेरा मतदान व्यर्थ नहीं जायेगा –
- मेरा एक मत चरित्रहीन प्रत्याशी को हरा सकता है और चरित्रवान को जिता भी सकता है l
- मेरा एक मत कर्मठ ग्राम प्रधान चुन सकता है, जिससे ग्राम हित में एक अच्छी पंचायत बन सकती है l
- मेरा एक मत विधान सभा का शिक्षित विधायक चुन सकता है, जिससे प्रान्त हित में एक अच्छी विधान सभा गठित हो सकती है l
- मेरा एक मत लोक सभा का कर्तव्यनिष्ठ सांसद चुन सकता है, जिससे राष्ट्रहित में एक अच्छी लोक सभा सक्रिय हो सकती है l
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