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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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आचार्य चाणक्य
ऐसा एक भी दिन नहीं जाना चाहिए जब आपने एक श्लोक , आधा श्लोक , चैथाई श्लोक या केवल एक अक्षर नहीं सीखा या आपने दान, अभ्यास या कोई पवित्र कार्य नहीं किया।
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भर्तृहरि
धैर्यवान मनुष्य आत्मविश्वास की नौका पर सवार होकर आपत्ति की नदियों को सफलतापूर्वक पार कर जाता है।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती
मेेरी आंख उस दिन को देखने के लिए तरस रही है, जब कश्मीर से कन्याकुमारी तक सब भारतीय एक भाषा बोलने और समझने लग जांएगे।
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डा0 भीमराव अम्बेडकर
विचारकों के कथन :-एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को भी तैयार रहता है।- डा0 भीमराव अम्बेडकर
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डा0 एस राधाकृष्ण
विचारकों के कथन :-मानव का मानव होना ही उसकी जीत है, दानव होना हार और महामानव होना चमत्कार है।- डा0 एस राधाकृष्ण
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महात्मा कबीर
विचारकों के कथन :-सांप के दांत, मक्खी के सिर और विच्छू की पूंछ में विष रहता है, परंतु दुर्जनों के तो पूरे शरीर में ही विष रहता है।- महात्मा कबीर
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रविंद्रनाथ टैगोर
विचारकों के कथन :-किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिए, क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है।- रविंद्रनाथ टैगोर
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रामधारी सिंह दिनकर
विचारकों के कथन :-कविता वह सुरंग है, जिसमें से गुजरकर मनुष्य एक विश्व को छोड़ कर दूसरे में प्रवेष करता है।- रामधारी सिंह दिनकर
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हितोपदेश
विचारकों के कथन :-बिना कारण कलह कर बैठना मूर्खता है। बुद्धिमता इसी में है कि अपनी हानि सह लें, लेकिन विवाद न करें।- हितोपदेश