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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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धीरुभाई अम्बानी
हमारे स्वपन विशाल होने चाहिए। हमारी महत्वाकांक्षाएं ऊँची होनी चाहिए। हमारी प्रतिबधता गहरी होनी चाहिए और हमारे प्रयत्न बड़े होने चाहिए।
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अन्ना हजारे
स्वतंत्रता के लिए लाखों लोगों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया, लेकिन कुछ स्वर्थी लोगों के कारण हमें वास्तविक आजादी नहीं मिली है।
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लोकमान्य तिलक
विचारकों के कथन :-शरीर को रोगी और निर्बल रखने के सामान दूसरा कोई पाप नहीं है।- लोकमान्य तिलक
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विनोबा भावे
जब तक कष्ट सहने की तैयारी नहीं होती, तब तक लाभ दिखाई नहीं देता। लाभ की इमारत कष्ट की धूप में ही बनती है।
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भारतीय इतिहास
भारतीय इतिहास को आजतलक भारत में जनित, संस्कारित एक भारतीय ने जितना अच्छा जाना हैै, विपरीत सभ्यता, संस्कृति में जनित, संस्कारित किसी विदेशी ने नहीं। उसने तो भारतीय इतिहास को कभी जानने का प्रयास ही नही किया, उसका मात्र एक यही उद्देश्य रहा है कि किस तरह भारत की संगठित शक्ति एवं सुख समृद्धि को…