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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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गौतम बुद्ध
विचारकों के कथन :-मनुष्य क्रोध को प्रेम से, पाप को सदाचार से, लोभ को दान से और झूठ को सत्य से जीत सकता है।- गौतम बुद्ध
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रविंद्रनाथ ठाकुर
विचारकों के कथन :-मानव का जीवन एक महानदी की भांति है जो अपने बहाव द्वारा नवीन दिशाओं में राह बना लेती है।- रविंद्रनाथ ठाकुर
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महादेवी वर्मा
विचारकों के कथन :-अपने विषय में कुछ कहना प्रायः बहुत कठिन होता है, क्योंकि अपने दोष देखना आपको अप्रिय लगता है और उनको अनदेखा करना दूसरों को।- महादेवी वर्मा
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महर्षि अरविंद
विचारकों के कथन :-अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच-सींच कर महाप्राण शक्तियां बनाते है।- महर्षि अरविंद
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स्वामी रामतीर्थ
विचारकों के कथन :-जंजीरें, जंजीरें ही होती हैं, चाहे वे लोहे की हों या सोने की, वे समान रूप से तुम्हें गुलाम बनाती हैं।- स्वामी रामतीर्थ
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डा0 शंकरदयाल शर्मा
विचारकों के कथन :-सहिष्णुता और समझदारी संसदीय लोकतंत्र के लिए उतने हीआवश्यक हैं, जितने संतुलन और मर्यादित चेतना।- डा0 शंकरदयाल शर्मा
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डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्ण
विचारकों के कथन :-साहित्य का कर्तव्य केवल ज्ञान देना नहीं है, परंतु एक नया वातावरण देना भी है।- डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्ण
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विनोबा भावे
विचारकों के कथन :-द्वेष की बुद्धि को हम द्वेष से नहीं मिटा सकते, प्रेम की शक्ति ही उसे मिटा सकती है।- विनोबा भावे
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काका कालेकर
विचारकों के कथन :-सयंम संस्कृति का मूल है। विलासिता, निर्बलता, और चाटुकारिता के वातावरण में न तो संस्कृति का उद्भव होता है और न विकास का।- काका कालेकर
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सरदार वल्लभ भाई पटेल
विचारकों के कथन :-सत्याग्रह की लड़ाई हमेशा दो प्रकार की होती है। एक जुल्मों के खिलाफ और दूसरी स्वयं की दुर्बलता के विरुद्ध।- सरदार वल्लभ भाई पटेल