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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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स्वामी आर्यवेश
अच्छे के साथ अच्छे बनें, बुरे का साथ छोड़ दें, क्योंकि हीरे को हीरे से तराशा तो जा सकता है पर कीचड़ से कीचड़ साफ नहीं किया जा सकता।
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शरतचंद्र चट्टोपाध्याय
जो शक्षा मनुष्य को संकीर्ण और स्वार्थी बना देती है, उसका मूल्य किसी युग में चाहे जो रहा हो, अब नहीं है।
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नेल्सन मंडेला
मुझे सफलताओं से मत आंकिये, बल्कि जितनी बार गिरा हूं और गिरकर उठा हूं, उस बल पर आंकिये।
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महात्मा बुद्ध
जीवन मिलना भाग्य की बात है, मृत्यु होना समय की बात है, लेकिन मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहना ये अच्छे कर्मों की बात है।
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आचार्य चाणक्य
जो व्यक्ति शक्ति न होते हुए भी मन से हार नहीं मानता है, उसको दुनियां की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती।
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आचार्य चाणक्य
जीवन में एक बार जो फैसला ले लिया तो फिर पीछे मुड़कर मत देखो, क्योंकि पलटकर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते।
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अब्दुल कलाम आजाद
इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनन्द पाने के लिये ये जरूरी है।
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अटल बिहारी वाजपेयी
गरीबी बहुआयामी है। यह हमारी कमाई के अलावा स्वास्थ्य, राजनीतिक भागीदारी, हमारी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति पर भी असर डालती है।