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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री
आज गांव के लोग दुनियां की ओर देख रहे हैं। वे भी बेहतर जीवन चाहते हैं। यदि दूरस्थ शिक्षा की व्यवस्था है तो वे इसका लाभ लेना चाहते हैं।
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महात्मा गांधी
– अकेले का जो लाभ है वह अनुभव से ही सिद्ध हो सकता है l – विश्वास को हमेशा तर्क से तोलना चाहिए l जब विश्वास अँधा होता है तो वह मर जाता है l – थोडा सा अभ्यास बहुत से उपदेशों से बेहतर है l – राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में…
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आचार्य चाणक्य
हारना तब आवश्यक हो जाता है जब लड़ाई अपनों से हो और जीतना तब आवश्यक हो जाता है जब लड़ाई अपने आप से हो।
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मोरारजी देसाई
जब तक भारत का राजकाज अपनी भाषा में नहीं चलेगा, तब तक हम यह नहीं कह सकते कि देश में स्वराज है।
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कन्फ्युशियस
एक बेहतर आदमी भाषण देने में कमजोर हो सकता है, लेकिन व्यवहार के जरिए वह अपनी काबिलीयत साबित करता है।
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राल्फ वाल्डो इमर्सन
वहां मत जाइए, जहां रास्ता ले जाए बल्कि वहां जाइए, जहां कोई रास्ता नहीं है और वहां अपने निशान छोड़ जाइए।
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आचार्य चाणक्य
मेरे राष्ट्र की अखंडता में जो बाधक होगा, उसका मैं सर्वनाश करूंगा और स्वयं स्वर्ग के देवता भी मेरा मार्ग नहीं रोक सकते।
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आचार्य चाणक्य
हमें भूत के वारे में पछतावा नहीं करना चाहिए न ही भविष्य के वारे में चिंतित होना चाहिए। विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।
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स्वामी रामतीर्थ
केवल प्रकाश का अभाव ही अंधकार नहीं है, प्रकाश की अति भी मनुष्य की आंखों के लिए अंधकार है।