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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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आचार्य चाणक्य
एक बार काम शुरू कर लें तो असफलता का डर न रखें और न ही काम को छोड़ें। निष्ठा से काम करने वाले ही सबसे सुखी हैं।
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साध्वी संगीता
जेएनयू में जो लड़कियां देशद्रोही नारेबाजी कर रही थीं, उनके लिए मैं सिर्फ यही कहूंगी कि तुमसे अच्छी तवायफ होती है, जो जिस्म बेचती है, देश नहीं।
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रविदन्दन शास्त्री
श्री हरि नाम संकीर्तन साक्षात भगवान का स्वरूप है। भगवान का सिमरण ही मुक्ति का द्वार है। योग आत्मा और परमात्मा का मिलाप है।
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नरेश सोनी
हम बाहर विदेशों में बसे लोगों की चमक-दमक देखकर बड़े प्रसन्न होते हैं। मगर उनके अंदर छिपे दर्द को नहीं पहचानते।
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अनुराग कृष्ण शात्री
संत तुलसी दास ने श्रीराम कथा कलियुगी जीवों के लिए एक ऐसा उपहार दिया है जो आने वाली पीढ़ियां इसे पढ़कर अपना जीवन संवारेंगी।
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मदर टैरेसा
कल तो चला गया है और आने वाला कल अभी आया नहीं। आज का दिन हमारे पास है। आइये! हम इसकी अच्छी शुरुआत कर अपने जीवन को सफल बनाएं।
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जो चाहो ले लो
दुनियां से जो चाहो, तुम ले लोचाहो शूल, तो शूल मिलेंगेचाहो फूल, तो फूल मिलेंगेसूुई चुभाओ, तो शूल लगेंगेफूल बांटो, तो हार पड़ेंगेमुस्कुराहट छीनकर, शूल दर्द देता हैदर्द लेकर, फूल हंसी लौटा देता हैचाहो शूल, तुम शूल ले लोचाहो फूल, तुम फूल ले लोदुनियां से जो चाहो, तुम ले लोचेतन कौशल “नूरपुरी”