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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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4. वैदिक वर्ण व्यवस्था का सत्य
जुलाई 2017 मातृवंदना सामाजिक जन चेतना इस लेख का मुख्य प्रेरणा-स्रोत लाला ज्ञान चंद आर्य द्वारा लिखित “वर्ण व्यवस्था का वैदिक रूप” पुस्तक है l यह पुस्तक उनका अपने आप में एक हृदय स्पर्शी और अनूठा प्रयास है l पुस्तक में दर्शाया गया है – मानव शरीर के अवयव मुख-ब्राह्मण, बाहु-क्षत्रिय, उदर–वैश्य और पैर–शूद्र…
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स्वामी आर्यवेश
अच्छे के साथ अच्छे बनें, बुरे का साथ छोड़ दें, क्योंकि हीरे को हीरे से तराशा तो जा सकता है पर कीचड़ से कीचड़ साफ नहीं किया जा सकता।- स्वामी आर्यवेश
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3. मानव जीवन रहस्य
मातृवंदना जून 2017 ईश्वर की संरचना प्रकृति जितनी आकर्षक है, वह उतनी विचित्र भी है l जड़-चेतन उसके दो रूप हैं l इनमें पाई जाने वाली विभिन्न वस्तुओं और प्राणियों की अपनी-अपनी जातियां हैं l इन जातियों में मात्र मनुष्य ही प्रगतिशील प्राणी है l वह विवेक का स्वामी है l गुरु के सान्निध्य में…
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2. संपूर्ण ग्राम विकास का मूलमन्त्र
मातृवंदना मार्च अप्रैल 2017 हमारा भारत ग्रामों का राष्ट्र है l भारत तब पुनः विश्व शक्ति अथवा विश्वगुरु बन जायेगा, जब देश के समस्त गाँव विकसित हो जायेंगे l देश के हर गाँव में एक चिकित्सालय अवश्य होना चाहिए जिसमें चिकित्सक और चिकित्सा कर्मियों की कोई कमी न हो l हर चिकित्सालय, हर चिकित्सा सुविधा…
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1. परंपरागत शिक्षा-संस्कृति संरक्षण की आवश्यकता
आलेख – शिक्षा व्यवस्था मातृवंदना फरवरी 2017 यह शाश्वत सत्य है कि हम जैसी संगत करते हैं, हमारी वैसी भावना होती है l हमारी जैसी भावना उत्पन्न होती है, हमारा वैसा विचार होता है l हमारा जैसा विचार पैदा होता है, हमसे हमारा वैसा ही कर्म होने लगता है और जब हम जैसा कर्म करते…
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1. मैकाले की सोच का भारतीय शिक्षा-प्रणाली पर कुठाराघात
आलेख शिक्षा दर्पण – पंजाब सौरभ मई 2016 हिमाचल की मासिक पत्रिका “मातृवंदना” अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित आलेख “मैकाले की सोच-1835 ई० में” के अनुसार – यह एक वास्तविक लेख है l इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है l ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकार्ड में सुरक्षित है l…
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आचार्य श्रीराम शर्मा
मानसिक बीमारियों से बचने का एक ही उपाय है कि हृदय को घृणा से और मन को भय व चिंता से मुक्त रखा जाए।