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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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स्वामी राम तीर्थ
व्यक्ति को हानि, पीड़ा और चिंताएं, उसकी किसी आंतरिक दुर्बलता के कारण होती है। उस दुर्बलता को दूर करके कामयाबी मिल सकती है।
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रविंद्र नाथ टेगोर
मौत प्रकाश को खत्म करना नहीं है, ये सिर्फ दीपक को बुझाना है क्योंकि सुबह हो गई है।
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अब्दुल कलाम आजाद
अपने कर्म को सलाम करो, दुनियां तुम्हें सलाम करेगी। यदि कर्म को दूषित रखोगे? तो हर किसी को सलाम करना पडे़गा।
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नरेंद्र मोदी जी
सरकारें अएंगी, जाएंगी लेकिन देश सर्वोपरि है। आइए देश के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करें।
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आचार्य बालकृष्ण
छोटी-छोटी बातों के न समझने बाले व्यक्ति पर बड़ी बातों के लिए विश्वास नहीं किया जा सकता।