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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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यश का भागी
अनमोल वचन :- बुद्धि कुलीनता, संयम, स्वाध्याय, पराक्रम, मितभाषिता, सामर्थ्य के अनुसार दान करना और कृतज्ञता ज्ञापित करना ये आठों गुण मनुष्य को यश का भागी बनाते हैं।
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कर्म का फल
अनमोल वचन :-शुभ कर्म से सुख मिलता है और पाप कर्म से दुःख, सर्वत्र किए हुए कर्म का ही फल प्राप्त होता है, कहीं भी बिना किए का नहीं।
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श्रीराम जी की याचना
अनमोल वचन :-हे भविष्य के राजाओ! यह रामचंद्र आपसे विनम्रतापूर्वक बारम्बार प्रणाम कर याचना करता है कि आप लोग मेरे द्वारा बांधे गए धर्मसेतु की सदा रक्षा करते रहें।
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मनुष्य के रूप में पशु
अनमोल वचन :-जिन मनुष्यों में विद्या, तप, दान (त्याग भावना), ज्ञान, शील, गुण और धर्म नहीं है वे इस मृत्युलोक में भूमि पर भार बनकर मनुष्य के रूप में पशु के समान विचरते हैं।
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धर्म की महिमा
अनमोल वचन :-धर्म से ही अर्थ की प्राप्ति होती है। धर्म से ही सुख मिलता है। सारी इच्छाएं भी धर्म से ही पूरी होती हैं। यह विश्व भी धर्म पर ही खड़ा है।
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कर्म का स्वभाव
अनमोल वचन :-मनुष्य का पूर्वकृत कर्म उसके सोने पर साथ ही सोता है, उठने पर साथ ही उठता है और दौड़ने पर भी साथ ही दौड़ता है।
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अपना – अपना स्वभाव
अनमोल वचन :-बुढ़ापा सुंदर रूप को, आशा धीरता को, मृत्यु प्राणों को, दोष देखने की आदत धर्माचरण को, क्रोध लक्ष्मी को, नीच पुरुषों की सेवा सत्वभाव को, काम लज्जा को और अभिमान सर्वस्व को नष्ट कर देता है।
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मन का प्रयास
अनमोल वचन :-यह स्थिर न रहने वाला और चंचल मन जिस – जिस शब्दादि विषय के निमित्त से संसार में विचरता है, उस उस विषय से रोककर यानी हटाकर इसे बार – बार परमात्मा में ही निरुद्ध करें।
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विषैला मित्र
अनमोल वचन :-पीठ पीछे कार्य बिगाड़ने वाले और सामने प्रिय वचन बोलने वाले मित्र को त्याग देना चाहिए। वह मित्र विष से भरे उस घड़े के समान है, जिसके केवल ऊपर – ऊपर मुख पर ही थोड़ा सा दूध है।