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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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कहा जाता है
अनमोल वचन :-क्रोध कठिनाई से जीता जाने वाला शत्रु है, लोभ अनंत व्याधि है, सभी प्राणियों के हित में संलग्न मनुष्य साधु है। निर्दयी को असाधु कहा जाता है।
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चार बातों से
अनमोल वचन :-सच्ची विद्या अर्थात् ज्ञान से माया और मोह (अविद्या) का नाश होता है। अच्छे विचारों से संसार का प्रपंच छूटता है। दान देते रहने वाले को दरिद्रता नहीं सताती और सदाचार के पालन से बुराइयां नष्ट हो जाती हैं।
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सुख के लिए
अनमोल वचन :-पहली अवस्था में वह कार्य करे जिससे वृद्ध हो कर सुख पूर्वक रह सके और जीवन प्रयन्त वह कर्म करे जिससे मर कर परलोक में सुखपूर्वक रह सके।
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सिंहनी और गधी
अनमोल वचन :-सिंहनी अपने एकमेव सुपुत्र के बल पर निर्भय होकर आराम से सोती है, जबकि गधी के दस पुत्र होते हुए भी उन्हीं के साथ वह भी भार ढोती रहती है।
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शूर व पंडित
अनमोल वचन :-युद्ध तो पशु-पक्षी भी करते हैं और तोते-सारिकाएं भी पढ़ने का कार्य करते हैं और ज्ञान की बातें बताते हैं अर्थात (तोता रटंत) इसमें कौन सी विशेषता है? जो आदमी धन का दान करता है वही यथार्थ में शूर और वही सच्चे अर्थ में पंडित होता है।
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सबसे बड़ा क्रूर
अनमोल वचन :-जो अपने द्वारा भरण-पोषण के योग्य व्यक्तियों के बांटे बिना अकेले ही उत्तम भोजन करता है, अच्छा वस्त्र पहनता है, उससे बढ़कर क्रूर कौन होगा?
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सनातन धर्म
अनमोल वचन :-प्राण – संकट उपस्थिति होने पर भी न करने योग्य काम को नहीं करना चाहिए और करने योग्य काम को नहीं छोड़ना चाहिए, यही सनातन धर्म है।