जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • विज्ञान बिना

    अनमोल वचन :-जो विज्ञानवान् नहीं होता जिसका मन सदा अयुक्त होता है, उसकी इंद्रियां सारथी के दुष्ट घोड़े की तरह उसके वश में नहीं होती।

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  • लक्षमण जी

    लक्षमण जी भगवान श्रीराम से कहते हैं – भैया! उत्साह ही बलवान होता है, उत्साह से बढ़कर दूसरा कोई बल नहीं है। उत्साही पुरुष के लिए संसार में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं है।

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  • शस्त्र और बुद्धि

    अनमोल वचन :-शस्त्र के द्वारा मारे जाने वाले व्यक्ति सही अर्थों में नहीं मारे जाते हैं, बल्कि बुद्धि के द्वारा मारे जाने वाले ही सही अर्थों में निहत होते हैं, क्योंकि शस्त्रों के द्वारा तो व्यक्ति का केवल शरीर ही नष्ट होता है किंतु बुद्धि द्वारा उसके कुुल, वैभव व यश का नाश होता है।

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  • धर्म

    अनमोल वचन :-धर्म ही एक ऐसा मित्र है जो मरने पर भी साथ जाता है, अन्य सब कुछ तो शरीर के साथ ही नष्ट हो जाता है।

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  • संसार में

    अनमोल वचन :-समर्थ व्यक्तियों के लिए इस संसार में कोई काम मुश्किल नहीं है। व्यापार करने वालों के लिए दूरी का कोई महत्व नहीं। इसी प्रकार विद्वानों के लिए सारा संसार ही घर है, कोई स्थान विदेश नहीं है और मीठा बोलने वाले व्यक्ति के लिए इस जगत में कोई पराया नहीं है।

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  • ब्रह्म ही ब्रह्म

    अनमोल वचन :-यज्ञ में किया जाने वाला अर्पण ब्रह्म है, यज्ञ में प्रयुक्त हवन-सामग्री भी ब्रह्म है, ब्रह्म रूप कर्ता के द्वारा ब्रह्मरूप अग्नि में आहुति देने की क्रिया भी ब्रह्म है। इस ब्रह्म कर्म में समाधिस्थ साधक द्वारा प्राप्त किया जाने वाला फल भी ब्रह्म ही है।

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  • वैरागी पुरुष

    अनमोल वचन :-जो पुरुष सांसारिक आश्रय से रहित सदा परमानन्द परमात्मा में तृप्त है, वह कर्मों के फल और संग अर्थात कर्तव्य-अभिमान को त्यागकर कर्म में अच्छी प्रकार बर्तता हुआ भी कुछ भी नहीं करता है।

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  • महापुरुष

    अनमोल वचन :-जिसके सम्पूर्ण शास्त्र सम्मत कर्म भी बिना कामना और संकल्प के होते हैं तथा जिसके कर्मज्ञान रूपी अग्नि द्वारा भस्मीभूत हो गए हैं, उस महापुरुष को ज्ञानीजन भी पंडित कहते हैं।

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  • शब्द

    अनमोल वचन :-यदि शब्द नामक प्रकाश सम्पूर्ण संसार में व्याप्त न हो तो तीनों लोकों में अंधकार छा जाए।

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  • श्रीकृष्ण जी

    हे  अर्जुन! सज्जन पुरुषों का उद्धार करने के लिए और दूषित कर्म करने वालों का नाश करने के लिए तथा धर्म की स्थापना हेतु मैं (श्रीकृष्ण) युग-युग में प्रकट होता हूं।

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