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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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विज्ञान बिना
अनमोल वचन :-जो विज्ञानवान् नहीं होता जिसका मन सदा अयुक्त होता है, उसकी इंद्रियां सारथी के दुष्ट घोड़े की तरह उसके वश में नहीं होती।
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लक्षमण जी
लक्षमण जी भगवान श्रीराम से कहते हैं – भैया! उत्साह ही बलवान होता है, उत्साह से बढ़कर दूसरा कोई बल नहीं है। उत्साही पुरुष के लिए संसार में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं है।
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शस्त्र और बुद्धि
अनमोल वचन :-शस्त्र के द्वारा मारे जाने वाले व्यक्ति सही अर्थों में नहीं मारे जाते हैं, बल्कि बुद्धि के द्वारा मारे जाने वाले ही सही अर्थों में निहत होते हैं, क्योंकि शस्त्रों के द्वारा तो व्यक्ति का केवल शरीर ही नष्ट होता है किंतु बुद्धि द्वारा उसके कुुल, वैभव व यश का नाश होता है।
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ब्रह्म ही ब्रह्म
अनमोल वचन :-यज्ञ में किया जाने वाला अर्पण ब्रह्म है, यज्ञ में प्रयुक्त हवन-सामग्री भी ब्रह्म है, ब्रह्म रूप कर्ता के द्वारा ब्रह्मरूप अग्नि में आहुति देने की क्रिया भी ब्रह्म है। इस ब्रह्म कर्म में समाधिस्थ साधक द्वारा प्राप्त किया जाने वाला फल भी ब्रह्म ही है।
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वैरागी पुरुष
अनमोल वचन :-जो पुरुष सांसारिक आश्रय से रहित सदा परमानन्द परमात्मा में तृप्त है, वह कर्मों के फल और संग अर्थात कर्तव्य-अभिमान को त्यागकर कर्म में अच्छी प्रकार बर्तता हुआ भी कुछ भी नहीं करता है।
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श्रीकृष्ण जी
हे अर्जुन! सज्जन पुरुषों का उद्धार करने के लिए और दूषित कर्म करने वालों का नाश करने के लिए तथा धर्म की स्थापना हेतु मैं (श्रीकृष्ण) युग-युग में प्रकट होता हूं।