जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • गुरु – आचार्य

    – # विद्यार्थी को तराशकर एक योग्य ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र कोई बना सकता है तो वह गुरु ही हो सकता है l* – दूषित राजनीति से छुटकारा दिलाने हेतु चाणक्य जैसे आचार्यों को, चन्द्र गुप्त मौर्य जैसे विद्यार्थियों के साथ, आगे अवश्य आना पड़ता है l – जब जब चाणक्य जैसा कोई आचार्य…

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  • प्रभु प्रमाण

    हजार करो तीर्थ, लाख करो स्नान, जिसका हृदय साफ नहीं, कैसे प्रत्यक्ष मिले प्रभु प्रमाण ?

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  • जाति भेद – भाव

    मानव जाति भेद-भाव की दीवारें तोड़ो, जन-जन का मानव संग नाता जोड़ो l

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  • विद्याओं में पारंगता

    # अगर हम जीवन चुनौतियों का सामना करने में शास्त्र – शस्त्र विद्याओं में पारंगत नहीं हुए तो एक दिन विधर्मियों द्वारा बांस की भांति छिल दिए जायेंगे l*

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  • सशक्त व्यक्ति

    जीवन लक्ष्य –जीवन लक्ष्य की प्राप्ति, चुनौतियों का सामना किये बिना संभव नहीं lजीवन सार –जीवन – सार सबकी समझ में आने वाली वस्तु नहीं है l वह सत्य है और ये झूठ l वह दिन है और ये रात l

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  • सात्विक बुद्धि

    वेद और वैदिक ज्ञान के बिना मनुष्य जाति में सात्विक बुद्धि नहीं आ सकती l

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  • शिक्षा

    – गुरु – शिष्य के जिस संयुक्त प्रयास से शिष्य के जीवन का चहुँमुखी अर्थात शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का विकास होता है , शिक्षा कहलाती है l- # हर मंदिर, मठ में वेदाचार्य की नियुक्ति करनी चाहिए जो स्थानीय बालक/बालिकाओं को वैदिक विद्याओं का शिक्षण – प्रशिक्षण दे सकें l*

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  • एकाकी परिवार

    परंपरागत संयुक्त परिवार से वर्तमान एकाकी परिवार बहुत भिन्न हैं । इनमें मात्र माता – पिता और नौकर – चाकर ही होते हैं । पिता नौकरी करता है और माता घर का सब कार्य करती है या दोनों ही नौकरी करने बहार जाते हैं । अगर वे दोनों नौकरी करते हों तो घर और बच्चे…

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  • संयुक्त परिवार

    विश्व भर में अन्य सभ्यताओं की अपेक्षा मात्र सत्सनातन समाज ही एक ऐसा समाज है जिसकी दृष्टि से देखने पर मातृ – पक्ष में नानी – नाना, मामी – मामा, मासी – मासड़ मिलते हैं जबकि पितृ – पक्ष में पति-पत्नी, बेटी – बेटा, दादी – दादा, चाची – चाचा, ताई – ताया, बुआ -…

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  • माता – पिता 

    माता-पिता – गुरु माता – पिता बच्चे को वेद सम्मत संस्कार देते हैं । इसके साथ ही साथ वे परिवार/समाज का निर्माण/कल्याण भी करते हैं । जिस प्रकार महिला अपने परिवार और समाज की आंतरिक जिम्मेदारियों को भली प्रकार संभालती है, ठीक उसी प्रकार पुरुष भी परिवार हित में बाह्य जिम्मेदारियों को संभालते हैं ।परिवार…

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