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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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अखंड भारत
– # अखंड भारत का ही दूसरा नाम सनातन है, समस्त भू- मंडल सनातन मय है।*- # हम भारतीय हैं – अगर विश्वभर में हमें कोई पहचानता है तो वह हमारे देश प्रेम, धर्म परायणता, भारतीय संस्कृति से ही जानता है।*- # स्वदेश से प्रेम तो करके देखो, विरोधियों से स्वयं दूरी न हो जाए…
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1. कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था एवं ब्राह्मण समाज
मातृवन्दना जुन 2025 धर्म और अधर्म – समय सूचक यंत्र की भांति समय वृत्त निरंतर घूम रहा है । परिवर्तन प्रकृति का नियम है । दिन के पश्चात रात और रात के पश्चात दिन का आगमन अवश्य होता है । विश्व में कभी धर्म का राज स्थापित होता है तो कभी अधर्म का । सृष्टि…
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ईश्वर दर्शन
# जैसे रात में विचरण करने वाले उल्लू को दिन में दिखाई नहीं देता है, वैसे ही संसारिक सुख में मस्त रहने वाले को ईश्वर के भी दिव्य दर्शन नहीं होते है।*
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सद्भावना और दुर्भावना
भावनाएं दो प्रकार की होती हैं – सद्भावना और दुर्भावना l सद्भावना से मनुष्य का अपना और समाज का उत्थान होता है जबकि दुर्भावना से दोनों का पतन होता है l मनुष्य को किस भावना से कार्य करना चाहिए ? ये बात उसकी बुद्धि और प्रकृति पर निर्भर करती है l सद्भावना और दुर्भावना में…
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आश्चर्य
वास्तव में अँधा सूरदास नहीं, अँधा वो है जिसे सत्य नहीं दिखता l सूरदास ईश्वर दर्शन करता है और आँखों वाला पूछता है – ईश्वर कहाँ है !
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परम्परागत गुरुकुल शिक्षा
– # परिवार में बच्चों को संस्कार मिलते हैं। गुरुकुल में उनका पोषण और संवर्धन होता है ।*- # संस्कार विहीन शिक्षा समाज के लिए अभिशाप है।*- आत्मानुशासन की शिक्षा परम्परागत गुरुकुल से ही मिल सकती है – माता-पिता के सानिध्य में पहला गुरुकुल घर है और दूसरा गुरु-आचार्य के सानिध्य में उनका गुरुकुल l…
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घर
नारी एक – रूप अनेक -माँ, बहन, बहु और बेटी से ही हर घर संवरता है, इन्हें हर परिवार में उचित सम्मान मिलना चाहिए lघर स्वर्ग – धरती पर वह घर स्वर्ग समान है, जहाँ बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते हैं lघर तीर्थ – जो सन्तान आज्ञाकारी है, अपने माता-पिता की सेवा करती है, उसे…
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परिवार
नारी आभाव -जब कोई दो पहिया वाहन किसी एक पहिये के बिना नहीं चल सकता है तो नारी अभाव में परिवार मात्र नर से कैसे चल सकता है !परिवार –- जिस परिवार में आपसी प्रेम, सोहार्द व् शान्ति नहीं, उस घर की समस्त सुख-सुविधाएं किस काम की l – परिवार एक वह ठोस इकाई है…
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मानव
प्राणी जातियां – विश्वभर में विभिन्न प्राणियों की अनेकों जातियां पाई जाती हैं l उन जातियों में मानव भी एक जाति है जो अन्य प्राणियों से भिन्न है – दो हाथ, दो पैर, मुंह, नाक, कान, आँखें अर्थात वह पांच कर्मेन्द्रियाँ पांच ज्ञानेन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, अहंकार का स्वामी है l जैसे गाये को भैंस और…