जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    11. समय का स्वभाव

    दैनिक जागरण 24 अप्रैल 2007समय तो बहता जल हैवह बहता जाता गाता हैतू संभाल पलपल की करता चलजीवन पलपल से बन पाता हैगोली छूटती है बन्दूक सेफिर कभी नहीं आती है हाथसकल दिवस जाता पलपल मेंघड़ी भी नहीं देती है साथ

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    10. आलस्य

    दैनिक जागरण 18 अप्रैल 2007 प्राप्त वस्तु से संतुष्ट हुआतूने मेहनत करना छोड़ा क्योंकोई वस्तु रहेगी कब तक पास तेरेकर्म से तूने नाता तोड़ा क्योंआलस्य में क्यों बैठ गयातू अपने हाथपांव पसारमिट्टी का खिलौना मिट्टी में मिला देदेख मेहनत का भी चमत्कारआलसी नहीं आलस्य भगा देतू अगल बगल से दूरघोड़ा तन है तेराचाबुक मेहनत मार…

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    3. मेहनत

    अमर उजाला 4 अप्रैल 2007कली से बनते हैं फूल खिलते हैं फूल कांटों में अभ्यास बनती है मेहनत रहती नहीं है मेहनत बातों में खोज जिसे होती है मंजिल पा ही लेता है बिना परिश्रम किए जो ढूंढता है अपना समय नष्ट कर लेता है मेहनत से मिलता है मान मेहनत से बनती है शान…

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    9. धौलाधार का शृंगार

    दैनिक जागरण 30 मार्च 2007 आहा कैसी सुन्दर ओढ़ी बर्फीली चादर धौलाधार नेशुष्क मौसम से पाई मुक्ति धौलाधार नेनाले झरने नदियां सब फिर बहने लगे हैंताल बावडि़यां कूप जल से भरने लगे हैंधरती खेत खलिहानों को मिलने लगा है पानीरिमझिम रिमझिम बरसने लगा है पानीबर्फ से किया है फिर श्रृंगार धौलाधार नेआहा कैसी सुन्दर ओढ़ी…

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    2. सुख – शांति का रास्ता

    अमर उजाला 30 मार्च 2007जातियां होती हैं जीव जंतुओं कीमनुष्य नर नारी की नहींकरके जातिगत बंटवारा समाज कापा सकता तू सुख शांति नहींकौन सी जाति क्या है जातिइससे नहीं है तेरा कोई वास्ताहर प्राणी है रूप ईश्वर कासुख शांति का और न कोई रास्ता

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    8. गुरु का निरादर

    दैनिक जागरण 16 मार्च 2007 जब मन कर्म वाणी सेमैं गुरु का अनादर करता हूंतब मैं उनसे सुस्नेह कीसयंमी होते हैं गुरु सदाकरते हैं शिष्य हित की बातमैं शिष्य हूं मन चलाकरता हूँ अपने मन की बातमन की बातों में रम करजब मैं गुरु को भूल जाता हूंखाता हूं तब ठोकरें दरदरगुरु से दूर हो…

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    7. छात्रों की व्यथा

    दैनिक जागरण 10 मार्च 2007हमें पर्चियां पहुंचा करपरीक्षा में नकल को न करो हवाअमूल्य जीवन भ्रष्ट हो जाएगाहमारी अयोग्यता को न करो हवानकल से परीक्षा में हम चाहे पास हो जाएंगेऐसे तो हम कभी योग्य नही बन पाएंगेआगे योग्य नागरिक तुम्हें मिलेंगे कैसेयोग्य डाक्टर इंजीनियर तुम्हें मिलेंगे कैसेहमारे इन अमूल्य जीवन पलों कोनकल की तुम…

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    6. जागो धरती नन्दन

    दैनिक जागरण 2 मार्च 2007 जागो धरती नन्दन हो रहा क्रंदन महान कांप रही धरती गिर न जाए आसमान पीडि़त राष्ट्र निज नेत्र खोल जरा त्रस्त मानवता रक्त रंजित हो धरा जमा और मुनाफाखोरों का लगा है मेला स्वार्थ सिद्धि का पड़ा है घेरा पल पल लाता कम्पन प्रभंजन जहान जागो धरती नन्दन हो रहा…

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    5. भूजल संरक्षण

    भूजल संरक्षण का हर जगह रखना है ध्यान पल पल इससे सबको मिलता है जीवन दान अब हमने युद्धस्तर पर करना है भूजल का संरक्षण भूजल स्तर ऊपर लाना है होगा इससे हर जीवन का संरक्षण नहीं करेंगे अब हम और अधिकधरती का चीरहरण चारों ओर हरियाली होगी होगा भूजल पुनर्भरण जल संरक्षण

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    4. कहना है क्या

    दैनिक जागरण 15 फरवरी 2007आत्म बोध प्राप्त करने कोआत्म चिन्तन करना अच्छाआत्म ज्ञान हो जाएतो कहना है क्याआत्म दर्शन करने कोआत्मावलोकन करना अच्छाआत्म साक्षात्कार हो जाएतो कहना है क्याआत्म विश्वास बढ़ाने कोकलात्मक प्रतियोगिताओं में भाग लेना अच्छाअपनी पहचान बन जाएतो कहना है क्यासंसार एक परिवार निहारने कोआध्यात्मिक दृष्टि अपना लेना अच्छाकोई सद्गुरु बन जाएतो कहना…

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