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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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1. बोल सके तो
अमर उजाला 13 फरवरी 2007 बोल सके तो बोल प्यारेमीठे बोल तू बोलकीमती बोल तू बोल प्यारेबोल संभल कर बोलफूल मुरझा जाते हैं अक्सरकली सदा रहती नहींघाव तलवार के भर जाते हैंमगर बात कड़वी मिटती नहीं
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3. प्यारा वतन
दैनिक जागरण 26 जनवरी 2007 है वही मेरा प्यारा वतनहिमालय चूमता जहां ऊंचा गगनकण कण सौरभ लाती नित नूतन पवनपुण्य जीवन पाते मिलते जनगणनित क्रांतियों के जहां होते यत्नहै वही मेरा प्यारा वतनमिलता जहां देखने विशाल पाहन सेतुउस पार पापी मारा था रक्षा मानवता हेतुहोता जहां अधर्म का प्रतिक्षण पतनहै वही मेरा प्यारा वतन
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2. राही
दैनिक जागरण 19 जनवरी 2007 हम मानव संसार के राहीलगने न देंगे मानवता पर स्याहीउठने न पाएगा अज्ञान हाथीसबके रक्षक सेवक साथीहम तो हैं भले मर्मान्तकसेवा हेतु हमें कोई न आंतकहम मानव संसार के राहीलगने न देंगे मानवता पर स्याहीहम सब अपने हृदय के दीक्षकसुख रहे दुख के चिकित्सकरावण कंस नाम फिर न होगा विख्यातराम…
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1. देश वासियो
दैनिक जागरण 12 जनवरी 2007उठो नगर वासियोजागो देश वासियोदुखियारी भारत मां पुकार रहीआजादी दुख से कराह रहीदासता से मुक्त हुई है भारत माताकुरीतियों में है उसे फंसाया जाताउठो नगर वासियोजागो देश वासियोहोना था न केवल हमनें आजादप्रेम त्यागभाव भी हमनें करना था आवादपगपग पर नंगा न कोई होताभूखा पदपथ पर न कहीं कोई सोताउठो नगर…
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21. प्रेम पुजारी
दैनिक जागरण 12 दिसम्बर 2006प्रेम पुजारी बढ़ता चलसबका कष्ट हरता चलकभी खो देना न ध्येयकिसी से खाना न भयपानी है मंजिल आज नहीं तो कलप्रेम पुजारी बढ़ता चलसहारा मिले तो ले लेना तून मिले कदम बढ़ाना तूनिर्भय प्रतिपल आगे बढ़ता चलप्रेम पुजारी बढ़ता चलमंजिल सामने एक दिन आएगीघड़ी इंतजार की खत्म हो जाएगीसफलता मिलेगी आज…
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20. अभाव में
दैनिक जागरण 3 दिसम्बर 2006 गुण बिना, रूप सुन्दर करना है क्या?विनम्रता बिना, ज्ञान गूढ़ करना है क्या?सदुपयोग बिना, धन अपार करना है क्या?साहस बिना, शस्त्र-अस्त्र अजेय करना है क्या?भूख बिना, भोजन बलवर्धक करना है क्या?होश बिना, साहस अदम्य करना है क्या?परोपकार बिना, बलवान तन करना है क्या?सेवा-त्याग बिना, बसेरा अपनों संग करना है क्या?
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19. जिन्दगी की राह
दैनिक जागरण 25 नवंबर 2006अपने ही छूट जाते हैं बहुत दूरछोटी सी जिन्दगी की लम्बी राह परसदा नहीं रहता साथ यहां स्वदेह का भीबस पानी बुलबुला है सत्य की राह परसाथ नहीं देता हर कोई हर कहींहर पल और हर डगर परराह में लगती हैं ठोकरें कदम कदम परचलना पड़ता है अकेला ही संभल करउठता…
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18. संघर्ष की जिंदगी
दैनिक जागरण 18 नवंबर 2006है यही तो जिंदगी संघर्ष की है जिंदगीडगमगाना नहीं है प्रण सेविचलित नहीं होना है पथ सेआज का काम करना है आजकल पर नहीं छोड़ना है आजहै यही तो जिंदगी संघर्ष की है जिंदगीजिंदगी अपनी है ही क्याभयभीत रहे मंजिल मिलेगी क्यासामना करना है जीवन संघर्ष सेजीवन संवारना है जीवन संघर्ष…
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17. शिक्षा – दीक्षा
दैनिक जागरण 18 नवंबर 2006गधे सा बोझा उठाए हुएदेखो विद्यार्थी विद्यालय जाता हैकिताबी ज्ञान है सारा थैले मेंपढ़कर बाबू बन जाता हैहर साल बाबू ही बाबू बनते रहेंगेअगर देश के नौजवानखाद्यानों का काम चलेगा कैसेमिलेंगे खेतों के कहां से किसानमशीनों का चालक बनेगा कौनकलाओं का विकास करेगा कौनशिक्षा दीक्षा दी जाती है परिश्रम करने के…
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16. जय भारत के नौजवान
दैनिक जागरण 29 सितम्बर 2006जय भारत के नौजवानआओ सब मिल कर अपना कर्तव्य निभाएंकरके काम कुछ जग हित खुशहाल कहाएंरश्मी शीतल मिल कर नहाएंदेखे हमें सकल जहानजय भारत के नौजवानप्रतिज्ञा करके जहां भी ने सुखी बाप बनायाशूलों से बिंध कर जो नहीं प्रण से डगमगायाप्राण तज व्रतधारी ने सबको सच्चा मार्ग दिखायाकरके प्रण निभाए भारत…