जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    18. क्रांतिकारी

    दैनिक जागरण 13 जून 2007 पल भर नहीं जो कर्महीन रहताकुछ न कुछ करता रहता हैरखता अज्ञान शोषण अत्याचार पर कड़ी नजरदहकते अंगारों पर बे खबर चलता हैराह में मुसीबतें आएं चाहे जितनीवह नित आगे बढ़ता जाता हैमौत भी सामने क्यों न आएवह खुशी से निज कण्ठ लगाता हैक्रांति कभी आ नहीं सकतीहै यह तो…

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    17. सीने में

    दैनिक जागरण 27 मई 2007 कोई चिंगारी शोला नहीं बन सकतीऐसा उसमें दम नहींशोला चिंगारी से बनता हैपर चिंगारी शोले से नहींतिल भर चिंगारी में इतना दम हैपल भर में उससे शोला बन जाता हैशोला तो दहकता अंगारा हैउससे सब कुछ राख हो जाता हैसीने में जिसके आग दवी होदवा ही उसको रहने दोपंखा न…

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    1. श्रृंगार धौलाधार का

    पंजाब केसरी 21 मई 2007 कैसी सुंदर ओढ़ी बर्फीली चादर धौलाधार ने शुष्क मौसम से पाई मुक्ति धौलाधार ने नाले भरे नदियाँ सब बहने लगे हैं ताल बावड़ियाँ कूप सब जल से भरने लगे हैं धरती, खेतों, खलिहानों को मिलने लगा है पानी रिमझिम बरसने लगा है पानी बर्फ से किया फिर शृंगार धौलाधार ने…

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  • 1. श्रृंगार धौलाधार का

    पंजाब केसरी 21 मई 2007 कैसी सुंदर ओढ़ी बर्फीली चादर धौलाधार ने शुष्क मौसम से पाई मुक्ति धौलाधार ने नाले भरे नदियाँ सब बहने लगे हैं ताल बावड़ियाँ कूप सब जल से भरने लगे हैं धरती, खेतों, खलिहानों को मिलने लगा है पानी रिमझिम बरसने लगा है पानी बर्फ से किया फिर शृंगार धौलाधार ने…

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  • 1. श्रृंगार धौलाधार का

    पंजाब केसरी 21 मई 2007कैसी सुंदर ओढ़ी बर्फीली चादर धौलाधार ने शुष्क मौसम से पाई मुक्ति धौलाधार ने नाले भरे, नदियाँ सब बहने लगे हैं ताल, बावड़ियाँ, कूप सब जल से भरने लगे हैं धरती, खेतों, खलिहानों को मिलने लगा है पानी रिमझिम बरसने लगा है पानी बर्फ से किया फिर शृंगार धौलाधार ने आह…

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    16. भू – जल दोहन

    दैनिक जागरण 18 मई 2007बूंद बूंद से होता है भूजल पुनर्भरणसुनियोजित करना है भूजल दोहन व्यवहारसुरक्षित रखना है शुद्ध भूजल भंडारसुखी रहेगा मनमोहन संसारभूजल धरती की है अमूल्य सम्पत्तिव्यर्थ दोहन है आने वाली विपत्तिभूजल धरती का करता है श्रृंगारअनावश्यक दोहन सरासर है निराधार

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    15. कविता

    दैनिक जागरण 15 मई 2007 वीरों की तू पोषणहारी तू है कविता कवि की प्यारी देखा है मैंने तुझे सबके साथ पर वे सब तुझे नहीं लगाते हाथ अत्याचारी की तू हत्यारी तू है कविता कवि की प्यारीजिसने किया जब नीचता को सलामतूने किया उसका काम तमाम दुराचारी की तू संहारणहारी तू है कविता कवि…

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    14. ईर्ष्या – घृणा

    दैनिक जागरण 9 मई 2007आग से खेल रहा क्यों?वह राख बनाया करती हैईर्ष्या से भी प्रेम कर रहाहंसते को रुलाया करती हैघृणा कर नीच विचारों सेमगर इन्सान से नहींकरके ईर्ष्या घृणा इन्सान सेरह सकता तू सुख शांति से नहीं

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    13. कोटि – कोटि प्रणाम

    दैनिक जागरण 3 मई 2007मातृ भूमि तुझकोकरूं मैं क्या अर्पणसाहस नहीं मुझमेंबिन देरी करूं मैं आत्म समर्पणबस कार्य के सिवायफल की ओर न हो मेरा ध्यानसेवा की हो डगर अपनीऔर नित हो तुझे कोटि कोटि मेरा प्रणाम

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    12. स्नान गृह में

    दैनिक जागरण 29 अप्रैल 2007 दाढ़ी बना ले चाहे तू दांत साफ कर लेपर भाई चल पहले नल बंद कर देभूजल अनावश्यक बाहर आ रहाभूजल स्तर नीचे जा रहाअब फव्वारे से या टब में नहीं है नहानाबाल्टी भर पानी से ठीक है नहानाजब बाल्टी भर पानी से नहाया जा सकेदो बाल्टी भर पानी बहाना है…

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