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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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3. चोर
21 मार्च 2010 कश्मीर टाइम्सकाला होता है मन मेरा, काला ही सबको कहता हूँ, चोर भाव छुपाता है मन मेरा, चोर ही सबको कहता हूँ, नजर मेरी सबको देखती है, पर खुद को न कभी देख पाई है, ढूंढता हूँ बाहर, छुपाए चोर भीतर, नहीं बात समझ में आई है, चोर हूँ, क्यों न चोरी…
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2. भटका राही
कश्मीर टाइम्स 21 फरवरी 2010 भटक गया हूँ, राह से राह मैं अपनी भूलकर सही राह पर, आऊं भी तो कैसे? मैं राह खुद की खुद पहचानकर इच्छा और आशाओं के गहन अंधेरे में खो गया मेरा जीवन है तालाश खुद की, खुद करूँ कैसे? मैं नाहक बन गया दीन हीन हूँ क्या है अच्छा,…
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1. चैक डैम
कश्मीर टाइम्स 7 फरवरी 2010 थम जा, ये जल की धारा! छोड़ उतावली, बहे जाती है किधर?मुंह उठा, देख तो जरा, चैक डैम बन गया है इधरतू बाढ़ का भय दिखाना पीछे, पहले गति मंद करले अपनी,तू भूमि कटाव भी करना पीछे, पहले चाल धीमी करले अपनी,यहां रोकना है, थोड़ी देर, रुक सके तो रुक…
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1. मानवी उर्जा – ब्रह्मचर्य
जनवरी 2010 मातृवन्दनाविद्यार्थी जीवन को ब्रह्मचर्य जीवन कहा गया है। इस काल में विद्यार्थी गुरु जी के सान्निध्य में रह कर समस्त विद्याओं का सृजन, संवर्धन और संरक्षण करके स्वयं अपार शक्तियों का स्वामी बनता है। सफल विद्यार्थी बनने के लिए विद्यार्थी को ब्रह्मचर्य या मानवी उर्जा का महत्व समझना अति अवष्यक है। ब्रह्मचर्य के…
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1. छब्बीस जनवरी
मातृवंदना जनवरी 2010 दुखिया का दुःख मिटाने को, दुःख से राहत दिलाने को, आशा का दीपक बन हम जगमगाएँ, छब्बीस जनवरी है आज, आओ! खुशी का दिन मनाएंयुवावर्ग में हो नवजीवन का संचार, दूर भागे सबकी निराशाओं का अंधकार, काँटों में से फूल हम चुनचुन कर लाएँ, छब्बीस जनवरी है आज, आओ! खुशी का दिन…
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3. स्वदेश प्रेम
मातृवंदना दिसम्बर 2009 स्वदेशी पका, पौष्टिक, ताजा खाने वालो!तुम फास्ट-फूड खाते हो क्यों ?पहले सदा अरोग्य ओर स्वस्थ रहते थे,अब तुम रोगी बन रहे हो क्यों?फास्ट-फूड है विदेशी खाना,कोई नहीं कहता, यह भारत के हैं पकवान,पकवान स्वदेशी छोड़, तुम खाते विदेशी पकवानकोई नही कहेगा,तुम्हें स्वदेश से है ममता महान
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9. विश्व दर्पण में भारतीय संस्कृति
20 दिसम्बर 2009 दैनिक कश्मीर टाइम्स प्राचीन भारतवर्ष विश्व मानचित्र पर आर्यावर्त देश रहा है। आर्य वेदों को मानते थे। वे अपने सब कार्य वेद सम्मत करते थे। वेद जो देव वाणी पर आधारित हैं, उन्हें ऋषि मुनियों द्वारा श्रव्य एवं लिपिबद्ध किया हुआ माना जाता है। वेदों में ऋगवेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद प्रमुख हैं । वे सब सनातन…
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19. मुसाफिर हो
कश्मीर टाइम्स 6 दिसंबर 2009 आने वाले आते हैं,जाने वाले जाते हैं,आना, जाना खेल दुनियां का,खेल है, पल दो पल का,दुनियां का जाना पहचाना है,मुसाफिर हो, जाना हैसभी संग प्रेम करने वाले,हर काम बखूबी करने वाले,कुछ खट्टी यादें,कुछ मीठी यादें,बस यहां यादों ने रह जाना है,मुसाफिर हो, जाना हैकहने वाले कहते रहेंगे,सुनने वाले सुनते रहेंगे,गिले…
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1. भारतीय संस्कृति का संरक्षण आवश्यक
नवम्बर 2009 मातृवन्दनायह बात सर्व विदित है कि भारत ऋषि मुनियों का देश रहा है। मनीषियों ने मानव जीवन को मुख्यता चार आश्रमों में विभक्त किया था। उनमें ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यासाश्रमों के अपने विशेष सिद्धांत थे।, उच्च आदर्श थे। उनके अनुसार मनुष्य अपना सार्थक एवं समर्थ जीवन यापन करता हुआ अपार शक्तियों का स्वामी बन जाता था। भारत…
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18. रक्षा – सुरक्षा
कश्मीर टाइम्स 22 नवम्बर 2009 मेहनती पिसे चक्की,चापलूस मारे फक्के,राज करे महामूर्ख,ज्ञानी खाए धक्केअत्याचार शोषण के साए में,जनहित दीखता है कहां?भय अन्याय के साम्राज्य में,जानमाल सुरक्षित होता है कहां?