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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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19. मुसाफिर हो
कश्मीर टाइम्स 6 दिसंबर 2009 आने वाले आते हैं,जाने वाले जाते हैं,आना, जाना खेल दुनियां का,खेल है, पल दो पल का,दुनियां का जाना पहचाना है,मुसाफिर हो, जाना हैसभी संग प्रेम करने वाले,हर काम बखूबी करने वाले,कुछ खट्टी यादें,कुछ मीठी यादें,बस यहां यादों ने रह जाना है,मुसाफिर हो, जाना हैकहने वाले कहते रहेंगे,सुनने वाले सुनते रहेंगे,गिले…
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1. भारतीय संस्कृति का संरक्षण आवश्यक
नवम्बर 2009 मातृवन्दनायह बात सर्व विदित है कि भारत ऋषि मुनियों का देश रहा है। मनीषियों ने मानव जीवन को मुख्यता चार आश्रमों में विभक्त किया था। उनमें ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यासाश्रमों के अपने विशेष सिद्धांत थे।, उच्च आदर्श थे। उनके अनुसार मनुष्य अपना सार्थक एवं समर्थ जीवन यापन करता हुआ अपार शक्तियों का स्वामी बन जाता था। भारत…
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18. रक्षा – सुरक्षा
कश्मीर टाइम्स 22 नवम्बर 2009 मेहनती पिसे चक्की,चापलूस मारे फक्के,राज करे महामूर्ख,ज्ञानी खाए धक्केअत्याचार शोषण के साए में,जनहित दीखता है कहां?भय अन्याय के साम्राज्य में,जानमाल सुरक्षित होता है कहां?
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17. मेहनती
कश्मीर टाइम्स 15 नवंबर 2009 पहाड़ों को समतल करने वाले,बाधाओं से कब डरते हैं?खुद करते है हाथ, कार्य करने वाले,निर्धनता, बेरोजगारी दूर करते हैंमेहनती हाथों से कार्य करने वाले,जिंदगी में मौत से कहां डरते है?मन से राम नाम जपते हैं,ईश्वर का साक्षात्कार करते हैं
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16. क्या भारत ?
कश्मीर टाइम्स 1 नवम्बर 2009 विदेशों में कालाधन पहुंचाने से,चंद सिक्कों में स्वयं बिक जाने से,सस्ते में राष्ट्रीय सुख-शांति बिकवाने से,क्या भारत बना महान है?आज़ादी लेने हेतु रात-दिन तड़पने से,भूखे रहकर फांसी पर चढ़ जाने से,गोलियां खाकर शहीद हो जाने से,क्या भारत बना महान है?जगह जगह भाषा-भाषी मधुर संम्पर्क से,पग-पग पर धार्मिक सौहार्द से,मानव जाति…
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15. प्रदूषण का उद्गम
कश्मीर टाइम्स 4 अक्तूबर 2009 मकान, अस्पताल से बाहर आता प्रदूषण है,इंडस्ट्रीज, फैक्ट्रीज से बाहर आता प्रदूषण है,दुकान, गोदाम से बाहर आता प्रदूषण है,पशुशाला, बूचड़खानों से बाहर आता प्रदूषण है,डालते हैं कहां? हम उस प्रदूषण को,फैंकते है हम कहां? उस प्रदूषण को,क्या हम जलधारा में बहा देते हैं प्रदूषण?या सीमा से बाहर फैंक देते हैं…
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2. विषधर जानो
सितम्बर 2009 मातृवंदनासमझ सके, समझ ले भाई!चापलूस सांप दोनों हैं सगे भाई,चापलूस चापलूसी करता है,जहर सांप उगला करता है,चापलूस नहीं साथी किसी का,मतलब निकाला करता है,दूध पिलाओ चाहे जितनासांप डंक मारा करता है,बात जान ले, सारा यह जहान!चापलूस और सांप दोनों एक समान,
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8. आदर्श समाज की कल्पना
6 सितम्बर 2009 दैनिक कश्मीर टाइम्स सामाजिक जन चेतना आओ हम ऊँच-नीच का भेद मिटायें, सब समान हैं, चहुँ ओर संदेश फैलायें l भारतीय समाज में कोई जाति से बड़ा है तो कोई धर्म से, कोई पद से ऊँचा है तो कोई धनबल से l प्रश्न उठता है कि क्या ऐसा पहले भी होता था…
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1. पन्द्रह अगस्त
अगस्त 2009 मातृवंदनाआज दिन पन्द्रह अगस्त का आया हैजीने का अधिकार सबने पाया हैरिश्वत किसी से नहीं लेनी थी इसनेघूस किसी को नहीं देनी थी उसनेतूने कमिशन खाने का अधिकार किससे पाया हैआज दिन पन्द्रह अगस्त का आया हैयहांवहां गबनों का दौर चल रहा हैआए दिन घेटालों का पिटारा खुल रहा हैपलपल माल चोरी का…
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14. क्या तुम ———-?
कश्मीर टाइम्स 23 अगस्त 2009 जब निजहित तुम्हारा होगा देशहित से ऊँचा,और निज सुख तुम्हें दिखने लगेगा महान,तब क्यों कोई देशहित की बात करेगा?क्यों देशहित में कोई करेगा काम?जब देश नहीं रहेगा समृद्धि-सुरक्षा का अधिकारी,तब तुम क्या कर लोगे? निजहित में,जगह-जगह बनें हो नन्द भाई, भ्रष्टाचारी,क्यों धंसे हो? तुम भोग विलासी दलदल में,क्या जागेगा फिर…