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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति
जिज्ञासा –1.- “जिज्ञासा रखना” – विद्यार्थी का एक विशेष गुण है 2.- जिज्ञासा रखने से – “ज्ञान” प्राप्त होता है lज्ञान –1.- ज्ञान का मुख्य स्रोत – “गुरु” है l2.- बिना गुरु – कभी “ज्ञान” नहीं मिलता है l3.- माता-पिता, अध्यापक और अध्यात्मिक गुरु से “ज्ञान” मिलता है l4.- सत्य “ब्रहम” है और ब्रहम ही…
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मंदिर का उचित रख – रखाव कैसे करें ?
संकलित दिनांक 17 अक्तूबर 2025मंदिर का उचित रख – रखाव (संरक्षण और देखभाल) एक पवित्र और जिम्मेदारी भरा कार्य है l इसे ठीक से करने के लिए शारीरिक, अध्यात्मिक और सामाजिक तीनों पक्षों का ध्यान रखना अति आवश्यक है l 1 स्वच्छता और व्यवस्था – प्रतिदिन फर्श, दीवारें, मूर्तियाँ और आस – पास का क्षेत्र…
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भगवद्गीता सार
संकलित दिनांक 27 दिसंबर 2025भगवद्गीता महाभारत का एक भाग है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। यह संवाद भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में हुआ। गीता जीवन, कर्म, धर्म, मन, आत्मा और मोक्ष का गहरा लेकिन व्यवहारिक ज्ञान देती है।1. गीता की पृष्ठभूमि -क्यों उपदेश दिया गया ? – अर्जुन…
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आदर्श जीवन कैसे अपनाएँ ?
दिनांक 28 नवंबर 2025 आलेख आदर्श जीवन आदर्श जीवन अपनाना कोई एक-दिन का काम नहीं है – यह एक निरंतर साधना, सही दृष्टिकोण, और व्यवहार में छोटे-छोटे बदलावों का परिणाम है। नीचे इसे सरल लेकिन गहराई से समझाया गया है, ताकि आप इसे अपने जीवन में वास्तविक रूप में लागू कर सकें। आदर्श जीवन कैसे…
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आदर्श जीवन की बाधाएं और समाधान
दिनांक 28 नवंबर 2025 आलेख आदर्श जीवन आदर्श जीवन का अर्थ है ऐसा जीवन जिसे व्यक्ति नैतिकता, संतुलन, आत्म-विकास और समाज में योगदान के आधार पर उत्तम समझे। आदर्श जीवन प्राप्त करना आसान नहीं होता, क्योंकि इसमें कई प्रकार की बाधाएँ आती हैं। साथ ही, उनके समाधान भी हैं। नीचे विस्तार से समझते हैं:आदर्श जीवन…
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अखंड भारत से क्या अभिप्राय है ?
दिनांक 19 नवंबर 2025अपना अखंड भारत “अखण्ड भारत” एक सांस्कृतिक-ऐतिहासिक और राजनीतिक-विचारधारात्मक अवधारणा है। इसका प्रयोग अलग-अलग व्यक्तियों या समूहों द्वारा अलग अर्थों में किया जाता है। 1. अखण्ड भारत का मूल अभिप्राय अखण्ड भारत का सामान्य अर्थ है—“एक ऐसा भारत जो बिना विभाजन के, एकात्मक और अविभाजित हो।”यह विचार इस मान्यता पर आधारित है…
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आदर्श जीवन क्या होता है ?
19 नवंबर 2025 आलेख आदर्श जीवन “आदर्श जीवन” एक सार्वभौमिक सत्य नहीं है, बल्कि व्यक्ति के उद्देश्य, मूल्य, धर्म, समाज और अनुभवों के अनुसार बदलता रहता है। फिर भी, प्राचीन भारतीय ज्ञान (गीता, उपनिषद), आधुनिक मनोविज्ञान और व्यवहारिक जीवनशैली – तीनों के आधार पर हम एक संतुलित, सुंदर और व्यावहारिक “आदर्श जीवन” की संरचना समझ…
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अखंड भारत से क्या अभिप्राय है ?
दिनांक 19 नवंबर 2025 “अखण्ड भारत” एक सांस्कृतिक – ऐतिहासिक और राजनीतिक – विचारधारात्मक अवधारणा है। इसका प्रयोग अलग – अलग व्यक्तियों या समूहों द्वारा अलग अर्थों में किया जाता है। 1. अखण्ड भारत का मूल अभिप्राय अखण्ड भारत का सामान्य अर्थ है – “एक ऐसा भारत जो बिना विभाजन के, एकात्मक और अविभाजित हो।”यह…
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ब्राह्मण का अर्थ
दिनांक 20 अक्तूबर 2025“ब्राह्मण” एक संस्कृत शब्द है जो “ब्रह्म” (परम सत्य, ज्ञान या ईश्वर) से बना है l इसका मूल अर्थ ज्ञान और सत्य के ज्ञाता व्यक्ति से है l शास्त्रीय दृष्टि से – मनुस्मृति वेद और पुराणों के अनुसार – ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म (परमात्मा या सत्य ज्ञान) को जानने सिखाने और…
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मतदान करो, करवाओ – लोकतंत्र सशक्त बनाओ
दिनांक 2 अक्तूबर 2025त्रिगुणमयी प्रकृति – गीता अनुसार – “प्रकृति त्रिगुण प्रधान है – सात्विक गुण, राजसिक गुण और तामसिक गुण l गुण गुणों में वर्तते हैं l सभी त्रिगुण एक दूसरे के विपरीत व्यवहार करते हैं l जैसे सात्विक गुण प्रबल होने पर राजसिक, तामसिक गुण निर्बल हो जाते हैं l राजसिक गुण के…