श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
-
13. धरती मां
दैनिक जागरण 15 जुलाई 2006धरती मां धरती मांतू है सबकी पालक पोषक धरती मांसर्दी गर्मी वर्षा सब सहती जातीमीठे कन्दमूल वनस्पति उपजातीफूलफल अन्न दालें खिलातीदेकर सकल पदार्थ घर बाहर भरती मांधरती मां धरती मांतू है सबकी पालक पोषक धरती मांऊंचे पहाड़ों से बनी तेरी छाती हैवन्य सम्पदा की तू ओढ़े साड़ी हैकल कल करते झरने…
-
12. प्रेरणा से
दैनिक जागरण 8 जुलाई 2006मन की इच्छाएं बढ़ती जा रहींबुद्धि निर्णय लेने में हो गई असमर्थइद्रियां पथभ्रष्ट होती जा रहीहृदय विशालता का नहीं कोई रहा अर्थसमाज बंट गया धर्म जाति वर्ग वादविवादों मेंघिर गया ऊंचनीच भेदभाव की दीवारों मेंविकासशील जीवन यात्रा तोड़ रही दमविकृत समाज व्यथा हो रही न कमहे विचारशील स्थिर मन और इद्रिय…
-
11. ज्ञान और शक्ति
दैनिक जागरण 21 जून 2006है बिन ज्ञान के शक्ति अंधीसमस्याएं करती है जटिल पैदाशक्ति बिना है ज्ञान अपाहिजकुछ ही होता है मुश्किल पैदाज्ञान और शक्ति मिलाकरजब किया जाता है कामसफलता की जय होती हैकर्ता को भी मिलता है इनामधार चढ़ी नहीं जिस तलवारवह है तलवार कह सकता है कौनशक्ति लिए अपार व साथ अज्ञान भीमनवा…
-
10. नारी
दैनिक जागरण 10 जून 2006 उठ जाग ऐ नारी भारत कीमिट न पाए अब पहचान और भारत कीतू नकल पश्चिम की क्यों करती हैतू रंगरूप अपना क्यों बिगाड़ा करती हैजीन्स पैंटकमीज पहनें सिर मुंडवा करकेदिखाए खुद को जैकेट कोट हैट लगा करकेउठ जाग ऐ नारी भारत कीमिट न पाए अब पहचान और भारत कीतू शराब…
-
9. अखंड जोत जलाने दो
दैनिक जागरण 25 मई 2006 विद्या, संस्कृति, साहित्य सृजन करने का,जीवन चुनौतियों का सामना करने का,त्याग, भक्ति, सेवा, बलिदान करने का,दिव्य शक्तियों का, सामर्थ्य का, योग्यता का,बोध करवाता है, विद्यालय कर्तव्य परायणता का,निष्पक्ष प्रकाशन, प्रसारण, प्रदर्शन करने वालो!उच्च जीवन, परिवार, समाज का पोषण करने वालो!ज्ञान-स्रोत हितैषी हैं वैदिक विद्या-मंदिर, उन्हें सक्रिय होने दो,अखण्ड जोत जलाते…