श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
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18. संघर्ष की जिंदगी
दैनिक जागरण 18 नवंबर 2006है यही तो जिंदगी संघर्ष की है जिंदगीडगमगाना नहीं है प्रण सेविचलित नहीं होना है पथ सेआज का काम करना है आजकल पर नहीं छोड़ना है आजहै यही तो जिंदगी संघर्ष की है जिंदगीजिंदगी अपनी है ही क्याभयभीत रहे मंजिल मिलेगी क्यासामना करना है जीवन संघर्ष सेजीवन संवारना है जीवन संघर्ष…
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17. शिक्षा – दीक्षा
दैनिक जागरण 18 नवंबर 2006गधे सा बोझा उठाए हुएदेखो विद्यार्थी विद्यालय जाता हैकिताबी ज्ञान है सारा थैले मेंपढ़कर बाबू बन जाता हैहर साल बाबू ही बाबू बनते रहेंगेअगर देश के नौजवानखाद्यानों का काम चलेगा कैसेमिलेंगे खेतों के कहां से किसानमशीनों का चालक बनेगा कौनकलाओं का विकास करेगा कौनशिक्षा दीक्षा दी जाती है परिश्रम करने के…
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16. जय भारत के नौजवान
दैनिक जागरण 29 सितम्बर 2006जय भारत के नौजवानआओ सब मिल कर अपना कर्तव्य निभाएंकरके काम कुछ जग हित खुशहाल कहाएंरश्मी शीतल मिल कर नहाएंदेखे हमें सकल जहानजय भारत के नौजवानप्रतिज्ञा करके जहां भी ने सुखी बाप बनायाशूलों से बिंध कर जो नहीं प्रण से डगमगायाप्राण तज व्रतधारी ने सबको सच्चा मार्ग दिखायाकरके प्रण निभाए भारत…
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15. शिक्षा का विदेशीकरण
दैनिक जागरण 24 सितम्बर 2006स्वदेशी शिक्षा का विदेशीकरण करने वालोस्वदेश की पहचान का अनादर करने वालोविदेशी कोई अनजाना स्वदेश आ जाएगाकरके मीठी बातें तुमसे भेद सारे ले जाएगाखुद तुम्हें घर से निकालेगा धक्के देकरबन जाएगा वह स्वामी तुम्हारा सर्वस्व लेकरतब बन जाओगे तुम उसके सामने क्याफिर कर पाओगे तुम अपने लिए क्या
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14. सत्य आचरण
दैनिक जागरण 16 सितम्बर 2006श्रेष्ठ साहित्य है कामधेनुदूध सम मिलती है शक्तिज्ञानी की बात ही छोड़ोमूर्ख भी करने लगता है भक्तिसद्ग्रंथ खोलो पढ़ लो जराजीवन कल्याण हो जाएगासत्य आचरण करते चलोजमाना सत्युग हो जाएगा