श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
5. जिंदगी से कला जोड़ो, नशा नहीं
अक्तूबर 2020 मातृवंदना मानव जीवन दर्शन – 5 जीना भी एक कला है। जो युवा कलात्मक विधि से जीना सीख जाता है, वह मानों उसके लिए सोने पर सुहागा। कलात्मक विधि से जीने के लिए युवा का किसी न किसी कला के साथ जुड़े रहना अति अवश्यक है। इसके लिए युवा को मांस-मदिरा सेवन और…
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
4. आतताई नहीं, मानवतावादी बनो
आलेख – सामाजिक चेतना मातृवन्दना सितम्बर 2020 “मनु व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप” लेख में डा० बीसी चौहान ने लिखा है l मनुस्मृति के अध्याय 3 के श्लोक 167 और 168 के अनुसार – चारों वर्णों के पितर वैदिक ऋषि थे l ब्राह्मण वर्ण के पितर भृगु ऋषि के पुत्र सोम थे l क्षत्रिय अंगीरा ऋषि…
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
2. कला – साधना जीवनोपयोगी है
आलेख – मातृवन्दना जुलाई अगस्त 2020 जीना भी एक कला है l जो व्यक्ति भली प्रकार जीना सीख जाता है, वह मानों उसके लिए सोने पर सुहागा l भली प्रकार जीने के लिए व्यक्ति का किसी न किसी कला के साथ जुड़े रहना अति आवश्यक है भी l मनुष्य को मांस-मदिर और धुम्रपान से सदैव…
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
1. डिह्बकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में समरसता
आलेख – धर्म संस्कृति मातृवन्दना मार्च अप्रैल 2020 ऋषि-मुनि, सिद्ध, सन्यासी, साधु-सन्त, महात्मा और परमात्मा के साथ जुड़े माणिकों एवं अलंकारों से सुशोभित, भारत माता के सरताज, देव और वीरभूमि हिमाचल प्रदेश की तराई में राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है जिला कांगड़ा, का प्रवेश द्वार नूरपुर, के उत्तर में सहादराबान से सर्पाकार एवं घुमावदार सड़क…
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
3. जल संग्रहण और उसकी उपयोगिता
जनवरी 2020 मातृवंदना पर्यावरण चेतना – 4 हर स्थान पर नहरें व समयानुकूल वर्षा न होने से एकमात्र नलकूप ही खेतों की सिंचाई करने के संसाधन होते हैं l खेतों की सिंचाई करने हेतु नलकूपों की आवश्यकता पड़ती है l उनसे सिंचाई की जाती है l आवश्यक है, भूजल दोहन नियमित और फसल की आवश्यकता…