श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
2. अपने प्रति अपनी सजगता
मातृवन्दना मई 2019 मानव मन जो उसे नीच कर्म करने से रोकता है, विपदा आने से पूर्व सावधान भी करता है, वह स्वयं बड़े रहस्यमय ढंग से एक ऐसे आवरण में छुपा रहता है जिसके चारों ओर विषय, वासना और विकार रूपी एक के पश्चात् एक पहली, दूसरी तीसरी और चौथी परत के पश्चात् परत…
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1. आइये ! राष्ट्रभाव की जोत जगाएं
आलेख – मातृवंदना मार्च अप्रैल 2019 हम भारतवासी भारत के नागरिक हैं तो हमारा यह भी दायित्व बन जाता है कि हम देशहित में ही कार्य करें l हम जो भी कार्य कर रहे हैं, देश हित में कर रहे हैं l इस सोच के साथ हर कार्य करने से देश का विकास होना निश्चित…
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1. साधक आत्मोवाच
मातृवन्दना दिसम्बर 2018 रख सके तो याद रख है तेरा पांच तत्व का शरीर – रथ जहाँ ले जाना चाहे इसको हांके ले जा, हो के मस्त हैं नामी बलवान बहुत इसके दस इन्द्रिय घोड़े जब भी बे-लगाम हो जाये कोई दिशा छोड़ विषय रसास्वादन हेतु दौड़े शत्रु हैं भयानक अहं, मोह, लोभ,…
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2. भारत का भविष्य
मातृवंदना अक्तूबर 2018 आश्चर्य है कि सनातन धर्म अति प्राचीन होने पर भी संपूर्ण संसार में आज तक हिन्दुओं का अपना कहीं एक भी हिन्दू राष्ट्र नहीं है, परन्तु धर्म से प्रेरित मुट्ठीभर लुटेरे, आतंकवादियों ने मात्र डेढ़ दो हजार वर्षों में ही धर्म के नाम पर छप्पन मुस्लिम देश और अस्सी ईसाई देश ही…
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1. जागेगा स्वाभिमान जमाना देखेगा
आलेख – राष्ट्रीय भावना मातृवंदना जनवरी 2018 प्राचीन काल से ही हमारा देश एक अध्यात्म प्रिय देश रहा है भारत के ऋषि-मुनियों का संपूर्ण जीवन ज्ञान-विज्ञान अनुसन्धान एवंम शिक्षण-प्रशिक्षण कार्य में व्यतीत हुआ है उन्होंने सनातन संस्कृति में मानव जीवन को ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास जीवन चार श्रेणियों में विभक्त किया था l वे…