जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: मातृवंदना शिमला

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    2. हिंदी भाषा संकल्प

    मातृवन्दना सितम्बर 2010 हिंदी हो, हिन्द की भाषा, हिंदी से हिन्द की पहचान हो, हम सब बोलें भाषा हिंदी, यही संकल्प हमारा होघर हो या दफ्तर, गली चाहे कोई दुकान हो, निःसंकोच हम बोलें भाषा हिंदी, यही संकल्प हमारा होबात हो पत्र लिखने की या विज्ञापन प्रकाशन हो, लिखें हम भाषा हिंदी, यही संकल्प हमारा…

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    2. वैदिक वर्ण व्यवस्था का सत्य

    मातृवंदना मई 2010 इस लेख का मुख्य प्रेरणा-स्रोत लाला ज्ञान चंद आर्य द्वारा लिखित “वर्ण व्यवस्था का वैदिक रूप” पुस्तक है l यह पुस्तक उनका अपने आप में एक हृदय स्पर्शी और अनूठा प्रयास है l पुस्तक में दर्शाया गया है – मानव शरीर के अवयव मुख-ब्राह्मण, बाहु-क्षत्रिय, उदर–वैश्य और पैर–शूद्र हैं l प्रत्येक मनुष्य…

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    1. मानवी उर्जा – ब्रह्मचर्य

    जनवरी 2010 मातृवन्दनाविद्यार्थी जीवन को ब्रह्मचर्य जीवन कहा गया है। इस काल में विद्यार्थी गुरु जी के सान्निध्य में रह कर समस्त विद्याओं का सृजन, संवर्धन और संरक्षण करके स्वयं अपार शक्तियों का स्वामी बनता है। सफल विद्यार्थी बनने के लिए विद्यार्थी को ब्रह्मचर्य या मानवी उर्जा का महत्व समझना अति अवष्यक है। ब्रह्मचर्य के…

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    1. छब्बीस जनवरी

    मातृवंदना जनवरी 2010 दुखिया का दुःख मिटाने को, दुःख से राहत दिलाने को, आशा का दीपक बन हम जगमगाएँ, छब्बीस जनवरी है आज, आओ! खुशी का दिन मनाएंयुवावर्ग में हो नवजीवन का संचार, दूर भागे सबकी निराशाओं का अंधकार, काँटों में से फूल हम चुनचुन कर लाएँ, छब्बीस जनवरी है आज, आओ! खुशी का दिन…

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    3. स्वदेश प्रेम

    मातृवंदना दिसम्बर 2009 स्वदेशी पका, पौष्टिक, ताजा खाने वालो!तुम फास्ट-फूड खाते हो क्यों ?पहले सदा अरोग्य ओर स्वस्थ रहते थे,अब तुम रोगी बन रहे हो क्यों?फास्ट-फूड है विदेशी खाना,कोई नहीं कहता, यह भारत के हैं पकवान,पकवान स्वदेशी छोड़, तुम खाते विदेशी पकवानकोई नही कहेगा,तुम्हें स्वदेश से है ममता महान

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