श्रेणी: अपनी कवितायेँ
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1. साधक आत्मोवाच
मातृवन्दना दिसम्बर 2018 रख सके तो याद रख है तेरा पांच तत्व का शरीर – रथ जहाँ ले जाना चाहे इसको हांके ले जा, हो के मस्त हैं नामी बलवान बहुत इसके दस इन्द्रिय घोड़े जब भी बे-लगाम हो जाये कोई दिशा छोड़ विषय रसास्वादन हेतु दौड़े शत्रु हैं भयानक अहं, मोह, लोभ,…
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श्रेणी: अपनी कवितायेँ
इन्सान
इन्सान हूं मैंभेड़िए की खाल पहने हुए हूं, क्यों?बातें धर्म की करता हूं, मैंलहु बे गुनाहों का बहाता हूं, क्यों?करता हूं धर्म नाम पर हिंसाधर्म और पशुता में अन्तर रहा क्यामैं इन्सान कहलाता हूंबन गया पशु, अर्थ रहा क्या?हिंसा तो है धर्म पशु कासबको मरने की राह दिखाई हैहिंसा न कर वास्ता धर्म काचेतन बात…
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श्रेणी: अपनी कवितायेँ
आत्मावलोकन
था इन्सान मगर मैनेखुद से खुद वैर किया हैशैतान तो खुद बन बैठा हूंप्रभु को मैंने भुला दिया हैदेखा न कभी मैंने खुद कोपूछता हूं, तू है कौन?जान लूं मैं खुद को पहलेफिर पूछूं, बता तू है कौन?दूसरों का चेहरा दिख जाताअपना कभी दिखता नहींहर दोष दूसरों का दिख जाताअपना एक भी दिखता नहींपहले दूसरों…
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श्रेणी: अपनी कवितायेँ
आत्म विस्मरण
सदा चोट खाता हूं मैंबातों में, गैरों की आता हूंमेरे हित की होती हैंबात हितैशी की भूल जाता हूंइन्सान था पर मैंनेखुद से खुद वैर किया हैशैतान बना लिया मैने खुद कोप्रभु को मैंने भुला दिया हैजानता नहीं मैं खुद कोपूछता हूं, तू है कौन?क्या जान लूं? मैं पहले खुद कोफिर पूछूं, बता तू है…
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श्रेणी: अपनी कवितायेँ
आत्म विश्वास
विषय वस्तु समझ आ जाएगीलोक-भ्रमण करके देख लेबात ज्ञान-विज्ञान की समझ आएगीसुसंगत करके देख लेविषय-वस्तु का ज्ञान-वर्धन हो जाएगासाहित्य-ग्रंथ पढ़कर देख लेयोग्यता में निखार आ जाएगाकलात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण ले कर देख लेसांसारिक ज्ञान मिल जाएगासत्यनिष्ठ रह कर देख लेआत्म ज्ञान-विज्ञान बढ़ जाएगाविरही आंतरिक जिज्ञासा जगा कर देख लेज्ञान-विज्ञान का विस्तार हो जाएगाशैक्षणिक वातावरण बना कर देख…