श्रेणी: अपनी कवितायेँ
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श्रेणी: अपनी कवितायेँ
आत्म-प्रकाश
मैं क्यों बुद्धि का अंधा हो गया हूं?दो-तीन गुणों का तो मालिक बन गया हूंजो भी मैं बड़ाई प्राप्त करता हूंक्यों उसमें खुद को खुद भूल गया हूंधन्य है कि बड़ाई मेरे पास आती हैपर वह मुझ में विराजित दिव्यांश को जाती हैबस यह धारणा मेरी गलत हो गईराह भी मेरी आगे की आसान हो…
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श्रेणी: अपनी कवितायेँ
आत्म-जागरण
पराई आशा पर जीने वाले!पराए प्रकाश पर चलने वाले!पराई मेहनत खाने वाले!रास्ता छोड़ भटकने वाले!मिलेगी तुझे कब तक आस?मिलेगा तुझे कब तक प्रकाश?मिलेगा तुझे कब तक खाना?पड़ेगा तुझे कब तक पछताना?अपने साहस पर तू कर ले आस,अपनी राह पर खुद कर ले प्रकाश,नित अपनी मेहनत का खाया कर,जीवन की सही राह अपनाया कर,पराई आस पर…
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श्रेणी: अपनी कवितायेँ
जो चाहो ले लो
दुनियां से जो चाहो, तुम ले लोचाहो शूल, तो शूल मिलेंगेचाहो फूल, तो फूल मिलेंगेसूुई चुभाओ, तो शूल लगेंगेफूल बांटो, तो हार पड़ेंगेमुस्कुराहट छीनकर, शूल दर्द देता हैदर्द लेकर, फूल हंसी लौटा देता हैचाहो शूल, तुम शूल ले लोचाहो फूल, तुम फूल ले लोदुनियां से जो चाहो, तुम ले लोचेतन कौशल “नूरपुरी”
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1. देश हमारा
मातृवन्दना सितम्बर 2014 जन-जन का देख भाई चारा,विश्व हुआ हैरान हैदवी जुवान से प्रसंशा करता,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम——— वन्दे मातरमतरह तरह के फूल इसके,फूलदान में सब एक हैंसुगंध फैलाते चहुं ओर अपनी,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम————–वन्दे मातरमखेलना इन्हें पसंद तूफानों से,खुदको मिटा देना शान सेआन बान शान बनाए रखना,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम———- वन्दे मातरमबुरी…
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2. स्लोगन जल बाईसा
ज्ञान वार्ता छमाही 2013 जल है गुणों की खान, धरती की बढ़ाये शान, जल रहेगा,जीवन बचेगा, भू-जल बढ़ाओ,जीवन बचाओ, जल के संग,जल के रंग,जल है जहाँ, जीवन है वहां, जल, जीवन की आशा, सूखा, निराशा ही निराशा,जल की कहानी,जीवन की कहानी, जहाँ भू-जल सहारा है,वहां जीवन हमारा है, जल से पढ़, पेड़ों से जंगल,सूखे में…