जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: अपनी कवितायेँ

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    1. जल – धारा से

    मातृवन्दना अक्तूबर 2013 थम जा, ऐ जल की धारा ! छोड़ उतावली, बहे जाती है किधर?मुंह उठा, देख तो जरा चैकडैम बन गया है इधर तू बाढ़ का भय दिखाना पीछे पहले गति मंद कर ले अपनी तू भूमि कटाव भी करना पीछेपहले चाल धीमी कर ले अपनी यहाँ रोकना है थोड़ी देररुक सके तो…

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    1. जल संचयन

    ज्ञान वार्ता छमाही 2013 हमने बात वर्षा जल संचयन करने की मानी है, कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण करने की ठानी है,बावड़ी, कुआँ, तलब, पोखर, जोहड़ का पानी,जंगल, पेड़-पोधे, खेतों में लाता है हरियाली,भू-जल दोहन नियम से अपनाओ,भू-जल बचाओ और जीवन बचाओ,आज बचाए पानी ने कल सबको बचाना है, बाग़ – बगीचे, फूलों पर भंवरों ने गुनगनाना…

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    1. जल संचयन

    मातृवन्दना जून 2012 हमने बात वर्षा जल संचयन करने की मानी है, कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण करने की ठानी है,बावड़ी, कुआँ, तलब, पोखर, जोहड़ का पानी,जंगल, पेड़-पोधे, खेतों में लाता है हरियाली,भू-जल दोहन नियम से अपनाओ,भू-जल बचाओ और जीवन बचाओ,आज बचाए पानी ने कल सबको बचाना है, बाग़ – बगीचे, फूलों पर भंवरों ने गुनगनाना है,परागण…

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    1. स्लोगन जल बाईसा

    कश्मीर टाइम्स 6 मई 2012 जल है गुणों की खान, धरती की बढ़ाये शान, जल रहेगा,जीवन बचेगा, भू-जल बढ़ाओ,जीवन बचाओ, जल के संग,जल के रंग,जल है जहाँ, जीवन है वहां, जल, जीवन की आशा, सूखा, निराशा ही निराशा,जल की कहानी,जीवन की कहानी, जहाँ भू-जल सहारा है,वहां जीवन हमारा है, जल से पढ़, पेड़ों से जंगल,सूखे…

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    2. माँ

    जून 2011 मातृवन्दना सिंहनी बलवान सिंह जन्म देकर सदा अभय होकर सोती है गधी दस गधों की माँ होकर भी दुःख पाती, बोझा ढोती है सौ पुत्र थे, गन्धारी- धृतराष्ट्र के, दुःख ही दुःख पाया था पांच थे कुंती के प्यारे पांडव, दुःख में भी सुख पाया था माँ ! तू जनना धर्म परायण,ज्ञाननिष्ठ, कला…

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