श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
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3. नींद त्यागो – राष्ट्र संभालो
दैनिक कश्मीर टाइम्स 29 जून 1996 किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी अपनी सभ्यता और संस्कृति पर निर्भर करती है l कोई भी देशवासी विदेश में उसके अपने ही राष्ट्र की राष्ट्रीयता, भाषा, पहनावा, रहन-सहन, खाना, आचार- व्यवहार और स्वदेशी भावना से जाना तथा पहचाना जाता है l इसलिए राष्ट्र और उसकी राष्ट्रीयता से संबंधित…
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4. शाख – शाख पर
24 जून 1996 कश्मीर टाइम्सजिधर देखूं,उधर अजगर,इधर अजगर,उधर अजगर,आगे अजगर,पीछे अजगर,नीचे अजगर,ऊपर अजगर,अंदर अजगर,बाहर अजगर,छोटा अजगर,बड़ा अजगर,जिधर देखूं,उधर अजगर,अजगर ही अजगरहो जायेंगे जब हर शाख पर,बता चेतन चहकेंगे पंछी,कैसे? शाख शाख पर,
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3. घृणा – फूट
24 जून 1996 कश्मीर टाइम्सभड़कने नहीं देंगे, हम फिरघृणा-फूट की ज्वाला,अवरुध्द करेंगे, बढ़ती इसभयानक आंधी को,दुश्मनों का दिल तो हैपहले से ही काला,सीने पर लगने नहीं देंगे, अबकोई गोली किसी गांधी को,
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2. चाहेंगे हम
18 जून 1996 कश्मीर टाइम्सदे सकते हैं, हम सत्ता जिन शासकों को,हटा सकते हैं, हम उनको भी शासन से,लोकतांत्रिक हैं, हम बोलेंगे उन शासकों को,गद्दारी मत करना, तुम भूलकर भी स्वशासन से,दे सकते हो, कुशल और स्वच्छ प्रशासन देना,सुख समृद्धि देना और कल्याणकारी प्रशासन देना,नहीं तो फिर हमने तुम्हारा स्थान खाली कर देना,चाहेंगे हम तुम्हारा…
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1. किस काम का
कश्मीर टाइम्स 18 जून 1996सेवा जो कर न सके, वह तन है किस काम का ?नाम जो जाप न सके, वह मन है किस काम का ?कार्य जो सिद्ध कर न सके, वह धन है किस काम का ?सन्मार्ग जो दिखा न सके, वह ज्ञान है किस काम का ?जीवन-रस जो भर न सके, वह…