श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
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5. विदेशी शिक्षा से हमे क्या मिला ?
कश्मीर टाइम्स 26 जुलाई 1996 भारत पराधीन हो गया l कारण था – उस समय के महत्वाकांक्षी, अहंकारी राजनीतिज्ञों का अपने गर्व में चूर रहकर छोटी-छोटी बातों के लिए मात्र अपने हित में बदले की भावना से एक दूसरे को नीचा दिखाने हेतु आपस में लड़ते रहना l स्थान-स्थान पर आचार्यों तथा विद्वानों का अपमान…
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4. साधक मन और साधना
आलेख – कश्मीर टाइम्स 9 जुलाई 1996 साधना-प्रगति के अंतिम बिंदु तक पहुँचने के लिए जो जिज्ञासु प्रयत्नशील रहता है, वह कभी थकने या रुकने का नाम नहीं लेता है – साधक कहलाता है l वह भली प्रकार जानता है कि साधना के मार्ग पर फूल कम और कांटे अधिक मिलते हैं l फिर भी…
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1. सद्गुण संस्कार और हमारा दायित्व
आलेख – मानव जीवन दर्शन असहाय समाज वर्ग जनवरी जून 1996 ईश्वर द्वारा रचित प्रकृति में पृथ्वी और उसके चारों ओर ब्रह्मांड बड़ा विचित्र है l सूर्य में ताप, चन्द्रमा में चांदनी, वायु में सरसराहट और नदियों में कल-कल के मधुर संगीत का मिश्रण इस बात का का द्योतक है कि समस्त ब्रह्मांड में जो…
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2. लोक विकास – समस्या और समाधान
आलेख – असहाय समाज वर्ग जनवरी जून 1996 इस सृष्टि की संरचना कब हुई ? कहना कठिन है l सृष्टि के रचयिता ने जहाँ प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए आहार की व्यवस्था की है, वहां मनुष्य के जीवन से संबंधित हर पक्ष के साथ एक विपरीत पहलू भी जोड़ा है l जहाँ सुख…
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5. देख सके मन से देख
29 जून 1996 दैनिक कश्मीर टाइम्स स्वामी सबका ईश्वर है, प्राणी हैं अनेक, जीवन सबका समान है, देख सके तो मन से देख, नारी सबकी जननी है, माताएं हैं अनेक, बच्चे सबके समान हैं देख सके तो मन से देख,ज्ञान जननी बुद्धि है, मस्तिष्क हैं अनेक, आत्म – ज्ञान समान है, देख सके तो मन…