श्रेणी: मातृवंदना शिमला
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1. परंपरागत शिक्षा-संस्कृति संरक्षण की आवश्यकता
आलेख – शिक्षा व्यवस्था मातृवंदना फरवरी 2017 यह शाश्वत सत्य है कि हम जैसी संगत करते हैं, हमारी वैसी भावना होती है l हमारी जैसी भावना उत्पन्न होती है, हमारा वैसा विचार होता है l हमारा जैसा विचार पैदा होता है, हमसे हमारा वैसा ही कर्म होने लगता है और जब हम जैसा कर्म करते…
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भूजल स्तर में कैसे होगी वृद्धि?
भूजल स्तर में आ रही निरंतर गिरावट को जल का सदुपयोग करने से रोका जा सकता है। इससे भूजलस्तर की पुनः वृद्धि हो सकती है इसके लिए हमें आज ही से निरंतर जागरूक रहकर स्वयं कुछ प्रयास करने होंगे।जब भी पानी पीना हो, स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए, पीने के लिए सदा गहरे हैंडपंप, नलकूप,…
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3. स्थानीय विकास और जन सहयोग
मातृवंदना सितम्बर 2015 सेवा के नाम पर मानव जहाँ एक ओर समाज का विकास करता है तो दूसरी ओर जाने-अनजाने में उससे तरह-तरह के प्राकृतिक एवंम सामाजिक अपराध व शोषण भी हो जाते हैं l देखने, पढने और सुनने में समस्या गंभीर है पर जटिल नहीं l समाज का विकास होना आवश्यक है l ध्यान…
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2. छोटी – छोटी असावधानियों से भूजल स्तर जाएगा पाताल !
मातृवंदना अगस्त 2015 पर्यावरण चेतना हमारी अनेकों समस्याएं हैं, वह थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उन समस्याओं में गहरा होता जा रहा भूजल का गिरता स्तर, वर्तमान में राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। हम हर क्षण राष्ट्र के अधिकांश भूजल संसाधनों का कदम-कदम पर दुरुपयोग कर रहे हैं, परिणाम स्वरूप भूजल…
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1. सनातन धर्म एवं संस्कृति
अप्रैल मई 2015 मातृवंदनासभी कष्ट दूर हो जाते हैं l कोई समस्या शेष नहीं रहती है l विपदाओं का भी शमन हो जाता है l इसके लिए मनुष्य को सत्सनातन-धर्म का अनुसरण करना पड़ता है l वह धर्म मुख्यतः तीन बातों पर आधारित है – सत्य, सनातन और धर्म l परम पिता परमात्मा विशाल दिव्य…