श्रेणी: मातृवंदना शिमला
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1. जागेगा स्वाभिमान जमाना देखेगा
आलेख – राष्ट्रीय भावना मातृवंदना जनवरी 2018 प्राचीन काल से ही हमारा देश एक अध्यात्म प्रिय देश रहा है भारत के ऋषि-मुनियों का संपूर्ण जीवन ज्ञान-विज्ञान अनुसन्धान एवंम शिक्षण-प्रशिक्षण कार्य में व्यतीत हुआ है उन्होंने सनातन संस्कृति में मानव जीवन को ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास जीवन चार श्रेणियों में विभक्त किया था l वे…
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5. भारत जोड़ो – यह आज का नारा है
मातृवंदना अक्तूबर 2017 अर्थात देश तोड़ने की बात बीते कल की हो गई है l अब देश जोड़ने की बात हो रही है l युगों से हमारा भारतवर्ष जो एक अध्यात्म प्रिय देश रहा है, आज भी वैसा ही है l सदियों पूर्व सोने की चिड़िया – अखंड भारत की अपार सुख-समृद्धि देख कुछ गिने-चुने…
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4. वैदिक वर्ण व्यवस्था का सत्य
जुलाई 2017 मातृवंदना सामाजिक जन चेतना इस लेख का मुख्य प्रेरणा-स्रोत लाला ज्ञान चंद आर्य द्वारा लिखित “वर्ण व्यवस्था का वैदिक रूप” पुस्तक है l यह पुस्तक उनका अपने आप में एक हृदय स्पर्शी और अनूठा प्रयास है l पुस्तक में दर्शाया गया है – मानव शरीर के अवयव मुख-ब्राह्मण, बाहु-क्षत्रिय, उदर–वैश्य और पैर–शूद्र…
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3. मानव जीवन रहस्य
मातृवंदना जून 2017 ईश्वर की संरचना प्रकृति जितनी आकर्षक है, वह उतनी विचित्र भी है l जड़-चेतन उसके दो रूप हैं l इनमें पाई जाने वाली विभिन्न वस्तुओं और प्राणियों की अपनी-अपनी जातियां हैं l इन जातियों में मात्र मनुष्य ही प्रगतिशील प्राणी है l वह विवेक का स्वामी है l गुरु के सान्निध्य में…
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2. संपूर्ण ग्राम विकास का मूलमन्त्र
मातृवंदना मार्च अप्रैल 2017 हमारा भारत ग्रामों का राष्ट्र है l भारत तब पुनः विश्व शक्ति अथवा विश्वगुरु बन जायेगा, जब देश के समस्त गाँव विकसित हो जायेंगे l देश के हर गाँव में एक चिकित्सालय अवश्य होना चाहिए जिसमें चिकित्सक और चिकित्सा कर्मियों की कोई कमी न हो l हर चिकित्सालय, हर चिकित्सा सुविधा…